लखनऊ। पीजीआई इलाके में एक नवंबर को हुई मारपीट में घायल मजदूर की मौत के बाद शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ। पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाकर परिजनों ने पीजीआई थाने में शव रखकर करीब तीन घंटे तक हंगामा व प्रदर्शन किया। जिसके बाद पुलिस ने हत्या की धारा में एफआईआर दर्ज कर एक आरोपी को दबोच लिया। अधिकारियों ने पुलिस पर लापरवाही के आरोप की जांच कराने की बात कही है।
पीजीआई के कल्ली पश्चिम निवासी मजदूर मदनलाल रावत (42) का एक नवंबर को गांव के ही राजेश कुमार से विवाद हो गया था। दोनों पक्षों में जमकर मारपीट हुई थी। सिर पर गंभीर चोट लगने से जख्मी मदनलाल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां कुछ दिन इलाज के बाद मदनलाल को छुट्टी दे दी गई थी।
तीन दिन पहले मदनलाल की अचानक तबीयत बिगड़ गई तो परिजनों ने उन्हें केजीएमयू में भर्ती कराया। जहां बृहस्पतिवार देर रात उनकी मौत हो गई। चौक पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार शाम पांच बजे परिजन शव लेकर पीजीआई थाने पहुंच गए और हंगामा व प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए हत्या का केस दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। मौके पर पहुंचे एसीपी कैंट पंकज सिंह ने परिजनों को समझाकर शांत कराया और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद मदनलाल के परिजनों ने गांव के रहने वाले सचिन, राजेश, राकेश, शिवकुमार, नरेश और राजे के बेटे अमित के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया। इसमें मदनलाल की पत्नी मंजू रावत पर जानलेवा हमला और घर में घुसकर लूटपाट का भी आरोप लगाया है। पुलिस ने नामजद आरोपी सचिन को हिरासत में ले लिया है।
मंजू ने बताया कि मारपीट की घटना में उनके पति मदनलाल को गंभीर चोट आई थी मगर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करने के बजाय मामले में एनसीआर दर्ज की थी। इस बीच आरोपी लगातार धमकी दे रहे थे। पूरे परिवार को जान से मारने की बात कह रहे थे। मंजू के मुताबिक उन्होंने मुख्यमंत्री समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भी भेजा मगर पुलिस में कोई कार्रवाई नहीं की। एडीसीपी पूर्वी अली अब्बास ने बताया कि एक नवंबर को हुई मारपीट के मामले में दोनों पक्षों की तहरीर पर एनसीआर दर्ज की गई थी। मामले में कार्रवाई की जा रही है।