उत्तर प्रदेश राज्य हज कमेटी के चेयरमैन व पूर्व राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने मंगलवार को वीडियो ट्वीट कर दावा किया है कि भारत से सऊदी अरब हज करने गए लोगों ने भाजपा और आरएसएस की बर्बादी की दुआ मांगी। उन्होंने गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों से वीडियो की सच्चाई का पता कर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही कहा कि इनके पीछे छिपे हुए लोगों और संगठनों की जांच हो, उन पर देशद्रोह का मुकदमा होना चाहिए। इनकी नागरिकता समाप्त करते हुए उन्हें उनकी मानसिकता वाले देश में भेज देना चाहिए।
रजा ने कहा कि हज जैसी पवित्र यात्रा और काबा जैसे मुकद्दस जगह भी देश विरोधी विदेशी ताकतों के हाथों का खिलौना बन कर चंद लोगों ने अपनी नकारात्मकता वाली सोच का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि हज पर जाने से पहले यात्री लोगों से मिलकर अपनी गलतियों के लिए माफी मांगते हैं कि उनका हज कुबूल हो सके। जो लोग वीडियो में भाजपा और आरएसएस के नाश की बद्दुआ कर रहे हैं, उनका नजरिया हज का नहीं है। क्योंकि हज के नजरिये से जाने वाले यात्री नफरत फैलाने वाली बातें नहीं करते हैं। उन्होंने बताया कि वीडियो में दक्षिण भारतीय भाषा में बोलते हुए हज यात्री दिख रहे हैं। महिला हज यात्रियों के एक समूह से दक्षिण भारतीय भाषा में कोई व्यक्ति बददुआ करने के लिए अपील करते हुए दिख रहा है। उन्होंने इसे देश की सुरक्षा से जुड़ा मामला बताते हुए उच्च स्तरीय जांच करने की मांग की है।
पर, यहां सवाल यह भी उठता है कि पाञ्चजन्य का कहना है कि एक इस्लामिक विद्वान ने वर्ष 2019 में यह वीडियो शेयर किया था। इस पर मोहसिन रजा का कहना है कि यह वीडियो चाहे जब का हो, इसकी जांच होनी चाहिए। जहां तक इसके असली-नकली होने का सवाल है तो मैं कह सकता हूं कि दुआ करने वाले सभी एहराम बांधे हैं, जो सिर्फ काबा में ही मुसलमान बांधते हैं। उधर, इस मामले में बरेलवी मसलक के आलिम मौलाना शाहाबुद्दीन का कहना है कि काबा में कोई भी मुसलमान किसी के लिए भी बद्दुआ नहीं कर सकता है। इस वीडियो की सच्चाई की जांच होनी चाहिए और मोहसिन रजा को मुसलमानों को बदनाम करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।