यूपी में बारह हजार चिकित्सकों की फौज है लेकिन किसी के नाम कोई उपलब्धि नहीं है। मरीजों को इलाज नहीं मिल रहा है।
जबकि कई राज्य ऐसे हैं जहां डॉक्टरों की संख्या दो से तीन हजार ही है फिर भी वहां की चिकित्सा व्यवस्था यहां से बेहतर है।
प्रमुख सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अरविंद कुमार ने शनिवार को प्रांतीय चिकित्सकों को आईना दिखाते हुए यह बातें कही।
प्रमुख सचिव ने कहा, सरकारी अस्पतालों में दवा और उपकरणों की कमी नहीं है, फिर भी मरीज निजी अस्पताल जाने को मजबूर हैं।
सरकार ने चिकित्सकों की ज्यादातर मांगें मान ली हैं। अब आपका फर्ज है कि जिम्मेदारी से काम करें। अपनी छवि और स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए जनता से जुड़ें।
उन्हें निजी अस्पताल से ज्यादा अच्छी सेवाएं उपलब्ध कराएं। अस्पतालों में ऐसी सुविधा उपलब्ध कराएं ताकि कि इलाज के बाद कोई भी मरीज शिकायत न करे।
यह भी मिलीं हिदायतें
दो-दो साल चाइल्ड केयर लीव लेती हैं डॉक्टर। ज्यादा लीव है तो इसका मतलब यह नहीं कि छुट्टी पर ही रहें।