चुनाव के नतीजों से खीझे नेताओं को सेट करना अफसरों के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
सत्तारूढ़ दल के शीर्षस्थ लोगों के सामने ऐसे अफसर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। उन्हें पद जाने का डर भी सता रहा है।
कुछ पंचम तल पर बैठे अफसरों को साध रहे हैं तो कुछ राजनेताओं के दर पर मत्था टेक रहे हैं। चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही ऐसे अफसरों की बेचैनी सत्ता के गलियारों में साफ देखी जा रही है।
ऐसे अफसर किसी न किसी बहाने अपने नजदीकियों से संपर्क बनाकर सरकार का मिजाज टटोलने की कोशिश में लगे हैं।
मुख्यालय के एक अधिकारी ने इन हालात पर चुटकी ली और अपने सहयोगी अफसर से पूछा-देखते हैं कि बेहतर सेटर कौन है?