इसके अलावा मदरसा संस्थापक सैय्यद मोहम्मद जिलानी अशरफ की तहरीर पर कारी तैय्यब के खिलाफ जालसाजी, बंधक बनाकर गालीगलौज, जानमाल की धमकी व 7 क्रिमिनल लॉ अमेडमेंट एक्ट के तहत केस दर्ज करके उसे गिरफ्तार किया गया था।
दोनों मुकदमों में आरोपी से पूछताछ, पीड़ित पांच छात्राओं के बयान व डॉक्टरी मुआयना की कार्रवाई के साथ कारी तैय्यब को शनिवार को कोर्ट में पेश किया गया। वहां से उसे जेल भेज दिया था।
एएसपी ने कहा कि दुष्कर्म पीड़िता का शनिवार को महिला अस्पताल में परीक्षण कराया गया और अब सोमवार को डॉक्टरों के पैनल द्वारा मेडिकल किया जाएगा।
डॉक्टरी मुआयना के बाद पीड़िता को मजिस्ट्रेट के समक्ष ले जाकर कलमबंद बयान दर्ज कराए जाएंगे। तफ्तीश का पर्यवेक्षण कर रहे सीओ बाजार खाला अनिल कुमार यादव ने बताया कि शीलभंग, मारपीट व पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने वाली पांच छात्राओं के भी जल्द ही कलमबंद बयान दर्ज कराए जाएंगे।
आपबीती सुना परिवारीजन के साथ गई छात्राएं
सआदतगंज थाने के एसएसआई राजकेसर यादव ने बताया कि मदरसे से मुक्त कराई गई 52 छात्राओं में से सिर्फ छह ने रिपोर्ट दर्ज कराने के साथ बयान दर्ज कराए। शेष 46 छात्राओं ने पुलिस एवं चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की सदस्यों को आपबीती सुनाई लेकिन मैनेजर कारी तैय्यब के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की फिलहाल हिम्मत नहीं जुटा पाई।
मदरसे से छुड़ाई गईं 52 छात्राओं में से 11 और छात्राओं को रविवार को उनके परिवारीजनों को सौंपा गया। इससे पहले शनिवार को भी 29 छात्राओं को परिवारीजनों को सौंपा गया था। बाल कल्याण समिति के मुताबिक, बाकी बची 12 बच्चियों को मंगलवार तक परिवारीजनों के हवाले कर दिया जाएगा।
प्राग नारायण रोड स्थित राजकीय महिला शरणालय के गेट पर सुबह से ही छात्राओं के परिवारीजन जुट गए थे। यह देख बाल कल्याण समिति अध्यक्ष कुलदीप रंजन व सदस्य के साथ संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंच गए। परिवारीजनों से आईडी व फोटो लेकर कागजी कार्रवाई कर छात्राओं को उन्हें सौंपा गया।
इस दौरान लखनऊ समेत बाराबंकी, सीतापुर के अलावा बिहार से आए अभिभावक भी पहुंचे थे। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष कुलदीप रंजन के मुताबिक, सोमवार को भी अगर परिवारीजन आते हैं तो बाकी छात्राओं को उन्हें सौंपा जाएगा। लेकिन जिन बच्चियों का मेडिकल कराया गया है उनको न्यायालय के समक्ष पेश करने के बाद ही सौंपा जाएगा।
बाल कल्याण समिति की माने तो मदरसा प्रबंधक के बारे में बच्चियों से की गई बातचीत में साफ हुआ कि प्रबंधक गरीब छात्राओं को निशाना बनाता था। पहले साल 1200 रुपये की फीस के बाद हर साल फीस बढ़ा कर दबाव बनाता और बाद में माफ करने का खेल खेलता।
अब तो मदरसा भेजने का सवाल ही नहीं
महिला शरणालय में अपनी-अपनी बच्चियों को लेने आए परिवारीजनों का साफ कहना था कि अगर उनकी बच्ची इस तरह के आरोप लगाती तो वे उसे मदरसा कतई नहीं भेजते। बच्चियों ने कभी किसी तरह की शिकायत नहीं की। बिहार से आए एक अभिभावक ने कहा कि अब तो मदरसा भेजने का सवाल ही नहीं।