लखनऊ। कमिश्नरेट पुलिस के अधिकारी मोबाइल पर पुश-टू-टाॅक और सेलुलर (पीओसी) एप के जरिए बाहरी जिलों के अधिकारी व थाना प्रभारी से सीधे बातचीत कर सकेंगे।
यहीं नहीं, इस एप के जरिए वह मातहतों से वीडियो कॉल करने के साथ ही फोटो, मैसेज साझा कर सकेंगे। वीडियो भी भेज सकेंगे।
इस एप का मेरठ में कांवड़ यात्रा के दौरान व बरेली में सफल परीक्षण कर लिया गया है। अब लखनऊ कमिश्नरेट में परीक्षण के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। सफल होने के बाद वायरलेस सिस्टम को खत्म कर दिया जाएगा।
पुलिस महानिदेशक तकनीकी सेवायें संजय एम तरडे ने सोमवार को पुलिस लाइन में इस पीओसी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि क्यूआर कोड के जरिये सीयूजी नंबर पर यह एप डाउनलोड किया जा सकेगा। हर पुलिसकर्मी का क्यूआर कोड भी अलग होगा।
रेडियाे वायरलेस के आरआई राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिलों में तैनात पुलिस अधिकारियों व थानेदारों को एक लिंक भेजा जाएगा। इस पर ही सभी का अलग क्यूआर कोड होगा।
इसके माध्यम से स्कैन कर सीयूजी नंबर पर एप डाउनलोड हो जाएगा। इसके बाद मोबाइल की स्क्रीन पर (पीओसी) पुश-टू-टाॅक आएगा।
फिर इस पर ग्रुप बनाकर पीओसी डाउनलोड करने वाले हर थानेदार व पुलिसकर्मी एक-दूसरे से सीधे बातचीत कर सकेंगे। अधिकारी भी एक ही बटन दबाकर सीधे संपर्क में आ जाएंगे।
वारदात स्थल से वीडियो काॅल कर सकेंगे पुलिसकर्मी
डीजी के मुताबिक, अगर कोई अधिकारी तुरंत मौके पर नहीं पहुंच पा रहा है तो वह मातहतों से वीडियो कॉल कर वारदातस्थल देख सकेगा। पुलिस कमिश्नर अथवा एसपी अपने सभी मातहतों को इस एप के जरिये लाइन पर एक साथ बातचीत कर संदेश दे सकते हैं। इस नए एप के परीक्षण तक वायरलेस की पुरानी व्यवस्था चलती रहेगी।
डीजी ने एसीपी से की लाइव बातचीत
डीजी संजय एम तरडे ने प्रयोगात्मक रूप से इस एप के जरिए मोहनलालगंज, मलिहाबाद, बाजारखाला और काकोरी के एसीपी से बातचीत की। इसके अलावा सहारनपुर के एआरओ से इस एप के जरिये लाइव बातचीत करके भी दिखाया।