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सीबीसीआईडी के तत्कालीन एसपी को बयान के लिए नोटिस

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लखनऊ। ठेका दिलाने के नाम पर 9.72 करोड़ रुपये ठगने के मामले में पुलिस ने सीबीसीआईडी के तत्कालीन एसपी को बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस भेजा है। उधर, विवेचना में स्थानीय पुलिस के सहयोग को एसटीएफ ने कुछ इंस्पेक्टर की मांग की है। मामले में प्रदेश सरकार की सख्ती के चलते एसटीएफ और लखनऊ पुलिस कोई कोताही बरतने के मूड में नहीं है। विवेचक व गोमतीनगर के एसीपी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि मामले में प्रकाश में आए सभी आरोपियों को बयान के लिए नोटिस भेजा है। इसमें सीबीसीआईडी के तत्कालीन एसपी, जो अब डीआईजी के पद पर हैं, उनके भी बयान दर्ज होने हैं। अन्य आईपीएस अधिकारी और रिटायर्ड आईएएस अधिकारी के बयान भी दर्ज करने हैं। बुधवार को विवेचक ने एसटीएफ से मिले दस्तावेजों और शासन के आदेश पर पूर्व में की जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया। इसमें सभी आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य और बयान हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मामले में सचिवालय के एक समीक्षा अधिकारी के अलावा कई रडार पर हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए साक्ष्य जमा किए जा रहे हैं। इंदौर निवासी व्यापारी मंजीत सिंह भाटिया को ठेका दिलाने के नाम पर पशुधन विभाग के मंत्री के प्रधान सचिव रजनीश दीक्षित, निजी सचिव धीरज कुमार, पत्रकार अनिल राय, कथित पत्रकार एके राजीव समेत 11 लोगों ने 9.72 करोड़ रुपये ठग लिए थे। एसटीएफ ने सात लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोपी सचिवालय में ऑफिस में बैठकर फर्जीवाड़ा कर रहे थे। एफआईआर में आईपीएस का नाम न लिखकर बचाने का प्रयास एफआईआर में ठगों के साथी आईपीएस का नाम न लिखकर पुलिस अफसरों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया। पीड़ित के सीएम से शिकायत के बाद एसटीएफ ने जांच की और सीबीसीआईडी के तत्कालीन एसपी की भूमिका संदिग्ध पाई थी। जांच में साफ हो गया था कि जब मंजीत ने अपना रुपया वापस मांगा तो आरोपियों ने आईपीएस के जरिये उसे दबाव में लेने व धमकाने का प्रयास किया। सीबीसीआईडी के ऑफिस में उस वक्त मंजीत को लेकर गए तथाकथित पत्रकार समेत अन्य की रजिस्टर में एंट्री भी पाई गई है। इसके बाद भी आईपीएस का नाम एफआईआर में नहीं लिखा गया। चूंकि पूरी जांच एसटीएफ ने की थी, इसलिए साफ है कि इसके अधिकारियों ने आईपीएस को बचाने का पूरा प्रयास किया।
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