अपने खास अफसर को बचाने के लिए आला अफसर कोई न कोई बहाना गढ़ ही लेते हैं।
यूपी पुलिस के अफसरों में इस परंपरा का चलन अन्य विभागों की अपेक्षा कुछ अधिक ही है। मामला राजधानी के कप्तान से जुड़ा है।
जब कप्तान की तैनाती हुई तब भी उनके खिलाफ फर्जी मुठभेड़ में शामिल होने का आरोप था।
उस समय भी अफसर ‘जांच जारी है’ की आड़ लेकर कोई कदम उठाने से कतराते रहे और अब जब राजधानी में अपराध सिर चढ़कर बोल रहा है तब भी।
कुछ ही दिन पहले राजधानी में ताबड़तोड़ हो रहे अपराधों को लेकर जब सवाल किया गया तो एडीजी स्तर के एक अधिकारी ने अपने खास मातहत के बचाव में जमकर दलीलें पेश कीं।
कहा- सूबे में और राजधानी में, दोनों में ही जनसंख्या अधिक है और जहां अधिक जनसंख्या होती है, वहां अपराध होते ही रहते हैं।