फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

PM Crop Insurance Scheme : फसल बीमा योजना से किसानों का मोहभंग, शुरू से आखिर तक कंपनियां करती हैं मनमानी

Fri, 29 Jul 2022 04:10 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमित मुद्गल, लखनऊ

सार

कंपनियां नुकसान के आकलन से क्षतिपूर्ति देने तक करती हैं मनमानी। रबी की फसल की क्षतिपूर्ति के 4.87 करोड़ किसानों को नहीं मिले। कृषि विभाग किसानों से फसल बीमा कराने की कर रहा है अपील।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना - फोटो : twitter: @BJP4Delhi
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रदेश के किसानों का प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पर भरोसा साल-दर-साल कम होता जा रहा है। इसके दो प्रमुख कारण हैं, पहला नुकसान के आकलन में बीमा कंपनियों की मनमानी और दूसरा किसानों को क्षतिपूर्ति मिलने में अनावश्यक देरी। किसानों को रबी की फसल खराब होने की भरपाई क्षतिपूर्ति के 4.87 करोड़ रुपये अभी तक नहीं मिले हैं। इससे एक ओर किसान परेशान हैं तो दूसरी ओर कृषि विभाग ने खरीफ की फसल का ज्यादा से ज्यादा बीमा कराने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। 

विज्ञापन


राज्य सरकार चाहती है कि बारिश कम होने और मौसम की विपरीत परिस्थितियों के मद्देनजर किसान फसल बीमा योजना का लाभ उठाएं। खरीफ की फसल के लिए बीमा कराने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। इसलिए किसानों से अपील की जा रही है कि वे जल्द बीमा करा लें। 

फसल की क्षतिपूर्ति लेने में किसानों का छूटता है पसीना
मेरठ के गांव कुंडा निवासी राजपाल सिंह को फसल बीमा योजना पर भरोसा नहीं है। वह कहते हैं कि इसमें नुकसान का आकलन घटाकर किया जाता है। बीमा कंपनियां मनमर्जी करती हैं। पिछली खरीफ के सीजन में उनकी फसल खराब हुई तो उन्हें नाममात्र का मुआवजा मिला। वहीं मुरादाबाद कुंदरकी के प्रीतम सिंह ने बताया कि उन्हें रबी सीजन का क्लेम अब तक नहीं मिल पाया है। देर से पैसा मिले और वह भी कम तो क्या लाभ? शाहजहांपुर के रोशन कहते हैं कि जब गांव भर में नुकसान होता है, तभी बीमा कंपनियां इसे नुकसान मानती हैं। इस योजना में किसानों को कम और बीमा कंपनियों को ज्यादा लाभ है। नुकसान के बाद नियम बताए जाते हैं।
विज्ञापन


प्रदेश की प्रमुख फसल गन्ना को बीमा योजना से बाहर रखा
यूपी में लगभग 60 लाख किसान गन्ना की खेती करते हैं। इसके बावजूद प्रदेश की इस प्रमुख फसल को बीमा योजना से बाहर रखा गया है। अधिकारियों का कहना है कि गन्ने की फसल में नुकसान कम होता है। आग जैसी घटनाओं में फर्जीवाड़ा होने की आशंका रहती है। वहीं, किसानों का कहना है कि जानबूझकर गन्ने को बीमा से बाहर किया गया है। 

जलभराव में व्यक्तिगत धान की फसल भी बीमा से बाहर
फसल बीमा योजना में व्यक्तिगत धान की फसल को खेत में जलभराव होने की स्थिति मेें बाहर कर दिया गया है। अगर गांव के अधिकतर किसानों के खेत में जलभराव से धान को नुकसान हुआ है तभी बीमा लाभ मिलेगा। इक्का-दुक्का किसान को नहीं।

इन स्थितियों में मिलती है क्षतिपूर्ति

असफल बोआई :
अगर फसल की बोआई 31 जुलाई तक 75 प्रतिशत या उससे कम रह जाती है तो बीमित किसानों को बीमित राशि के सापेक्ष 25 प्रतिशत धनराशि क्षतिपूर्ति के रूप में देते हुए बीमा कवर खत्म कर दिया जाता है। अगर फसल बाद में खराब होती है तो बीमा क्लेम नहीं मिलेगा।

मध्यावस्था में बीमित फसल को नुकसान होने पर क्षतिपूर्ति : अगर फसल की बोआई से कटाई के 15 दिन तक दैवीय आपदा के कारण संभावित उपज में 50 फीसदी से अधिक की क्षति की आशंका बनती है तो नियमानुसार क्षति का आकलन करते हुए 25 प्रतिशत राशि तात्कालिक सहायता के रूप में सर्वेक्षण के 15 दिन के भीतर भुगतान का प्रावधान है। पुन: क्रॉप कटिंग प्रयोगों के आधार पर अतिरिक्त क्षतिपूर्ति का समायोजन किया जाता है।

कटाई प्रयोगों के आधार पर क्षतिपूर्ति : मौसम के शुरू में ही क्षेत्रवार फसलों की औसत उत्पादकता का निर्धारण किया जाता है। यदि मौसम के कारण क्रॉप कटिंग प्रयोग के आधार पर उत्पादकता कम पाई जाती है तो क्षति का आंकलन करते हुए भुगतान किया जाता है।

स्थानिक आपदाओं की स्थिति में (व्यक्तिगत आधार पर)
01. खड़ी फसल को ओलावृष्टि, जलभराव (धान को छोड़कर), भूस्खलन, बादल फटना, आकाशीय बिजली से उत्पन्न आग की स्थिति में योजना के प्रावधान के मुताबिक बीमित किसानिों को क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जाता है।
02. फसल कटाई के बाद 14 दिनों तक खेत में सुखाई के लिए रखी फसल को ओलावृष्टि, चक्रवात, बेमौसम चक्रवाती बारिश से नुकसान की स्थिति में भी बीमित किसानों को क्षतिपूर्ति देने का प्रावधान है। 

नुकसान की सूचना 72 घंटे में जरूर दर्ज कराएं 
किसान जहां से ऋण ले रहे हों, वहां से या जन सुविधा केंद्रों से फसल बीमा करा सकते हैं। किसान दैवीय आपदा में फसल नुकसान की सूचना 72 घंटे के अंदर कृषि विभाग के अधिकारियों, बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों अथवा राज्य सरकार के टोल फ्री नंबर 18008896868 पर दे सकते हैं।

प्रदेश में बीमित भूमि की स्थिति (लाख हेक्टेयर में)
फसल    2018    2019    2020    2021
खरीफ    27.41    18.89    16.88    15.60 
रबी    24.26    18.09    14.69    14.21 


किसानों को लगता है कि पूरी फसल की बीमा राशि मिलेगी, पर उन्हें समझना होगा कि केवल नुकसान की ही क्षतिपूर्ति होगी। रबी की फसल का मुआवजा इसी सप्ताह दे दिया जाएगा। 
-राजेश कुमार गुप्ता, कृषि सांख्यिकी व निदेशक फसल बीमा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का संचालन ग्राम पंचायत स्तर को इकाई मानते हुए कराया जा रहा है। यह योजना किसानों के लिए लाभकारी है। किसान इसे समझें और योजना का लाभ उठाएं। 
-सूर्य प्रताप शाही कृषि मंत्री

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें