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Lucknow News: बिना पंजीकरण कॉलोनियां में अब नहीं बेच पाएंगे भूखंड, नगर निगम की सीमा के बाहर बिल्डरों की मनमानी रोकने के लिए जिला पंचायत ने शुरू की सख्ती

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अतुल भारद्वाज
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लखनऊ। नए विकसित इलाकों में निजी कॉलोनियों में लोगों को संपत्तियां जैसे भूखंड, रो-हाउस बेचकर भाग जाने वाले बिल्डर, ब्रोकर पर अब जिला पंचायत सख्ती करेगा। नगर निगम की सीमा के बाहर के इलाकों में इनका विभव एवं संपत्ति कर (सीपी टैक्स) पंजीकरण अनिवार्य होगा। इसके अलावा इन पर टैक्स भी लागू होगा। एलडीए की सीमा में आए नए इलाकों को इसमें प्रमुख रूप से शामिल किया गया है।
जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी प्रणव पांडेय का कहना है कि देखने में आता है कि कई बार निजी बिल्डर बिना जरूरी मानचित्र स्वीकृत कराए और जमीन खरीद किए ही लोगों को भूखंड बेच देते हैं। अधिकतर समय यही होता है कि खरीदारों की रजिस्ट्री भी सीधे किसान से कराई जाती है। ऐसे में इन बिल्डर या उसके ब्रोकर का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं होता है। जिला पंचायत अब इसे सुनिश्चित कराएगा।
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बिना जिला पंचायत में पंजीयन के कोई भूखंड या अन्य संपत्ति नहीं बेची जा सकेगी। केवल ब्रोकर या बिल्डर ही नहीं योजना पर काम कर रहे आर्किटेक्ट के लिए भी पंजीयन कराना जरूरी होगा। ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू की जाएगी।
अधिकारियों का कहना है कि इसके लिए जिला पंचायत अधिनियम में शामिल विभव एवं संपत्ति कर का आरोपण, निर्धारण और वसूली नियमावली 205 में पंजीकरण व कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अभी तक केवल विकसित इलाकों में चुनिंदा व्यावसायिक उपयोग की संपत्तियों से ही कर वसूली की जाती थी। अब शासन के निर्देश पर बिल्डर, ब्रोकर को भी इसके दायरे में लाया गया है।
अपर मुख्य अधिकारी ने एलडीए सचिव को भी एक पत्र भेजा है। इसमें नगर निगम की सीमा के बाहर के 197 गांवों में स्वीकृत किए गए नक्शों और गांवों की सूची मांगी है। इससे यह तय हो पाएगा कि कौन से ऐसे बिल्डर हैं, जिनके नक्शे भी स्वीकृत नहीं और चोरी छिपे काम कर रहे हैं। प्राधिकरण की सीमा से बाहर के इलाकों में भी इसके लिए सख्ती होनी है।
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अपर मुख्य अधिकारी प्रणव पांडेय का कहना है कि अभी इस कर से जिला पंचायत की केवल 60 लाख रुपये ही आय होती है। नए इलाकों और बिल्डरों को इस दायरे में लाने के बाद इसमें इजाफा होगा। इससे अविकसित इलाकों में सफाई से लेकर स्ट्रीट लाइट, सड़क मरम्मत जैसे जरूरी काम कराए जा सकेंगे। सबसे अधिक फायदा उन लोगों को होगा, जो इन बिल्डर और ब्रोकर के जरिये भूखंड या रोहाउस खरीद रहे हैं। जिला पंचायत जल्दी ही सीपी टैक्स की दरों को बढ़ाने के प्रस्ताव को भी तैयार करेगा। अभी अधिकतम 6000 रुपये ही प्रति पंजीयन लिए जा सकते हैं। अगर कोई पूरी टाउनशिप बसाएगा तो भी बिल्डर को उतना ही पैसा देना पड़ेगा, जितना कोई चार रोहाउस बनाने वाला देगा। ऐसे में जरूरी है कि बड़े बिल्डर या व्यावसायिक संपत्तियों के स्वामियों पर अधिक सीपी टैक्स लगे। जिला पंचायत नगर निगम सीमा के बाहर के क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों पर यह कर लगाता है।
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