ठंड से ठिठुरते तीन लड़के यह सोचकर खुद को अपराधी बताते हैं कि हवालात में
पहुंचने पर कम से कम ठंड से तो जान बच जाएगी।
खुद को अपराधी साबित करने के
तमाम पैंतरे चलते हैं लेकिन पुलिसवाला उन्हें हवालात नहीं ले जाता।
हद
होने पर पुलिसवाला उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर ले जाता है, पर घुमा-फिराकर
वापस उसी स्थान पर छोड़ जाता है।
कुछ ऐसी ही कहानी है मध्य प्रदेश नाट्य
विद्यालय और निसर्ग के संयुक्त तत्वावधान में मंचित नाटक ‘हवालात’ की। जो
सोमवार को भारतेंदु नाट्य अकादमी के बीएम शाह प्रेक्षागृह में मंचित हुई।
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना लिखित नाटक का निर्देशन पीयूष वर्मा ने किया। मंच
पर अभिषेक, राहुल, गौरव, अनुज, सोहन, विनोद का अभिनय देखने को मिला।