महिलाएं न तो घर में सुरक्षित हैं, न ही समाज और ऑफिस में। कहने को तो
उन्हें समाज में बराबरी का हक दिया जा रहा है।
शिक्षा, स्वास्थ्य और
सुरक्षा में उन्हें प्राथमिकता मिल रही हैं, लेकिन वास्तविकता बातों से इतर
है। सच यह है कि महिला हिंसा में कमी नहीं आ रही है।
इस हिंसा का विरोध
1090 गुब्बारे छोड़कर किया जाएगा। जो राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में होने
वाले नाटक ‘1090-चुप्पी तोड़, खुलकर बोल’ के मंचन से पहले छोड़े जाएंगे।
नाटक का मंचन सत्यपथ रंगमण्डल संस्था की ओर किया जाएगा। संस्था के अध्यक्ष
मुकेश वर्मा ने बताया कि नाटक का मंचन 11 नवंबर को किया जाएगा।
ये
छोटी-छोटी तीन कहानियों का कोलाज है, जो एक ही घटनाक्रम में चलती नजर
आएंगी। नाटक की रिहर्सल कुड़ियाघाट पर चल रही है।