लखनऊ दहलाने की साजिश में गिरफ्तार किए गए पीएफआई कमांडर बदरुद्दीन को यूपी एसटीएफ ने मथुरा में दर्ज मुकदमे में पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है। मथुरा पुलिस ने सितंबर माह में खुलासा किया था कि हाथरस में दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में मौके का फायदा उठाकर पीएफआई के सदस्य जातीय हिंसा फैलाने की साजिश रच रहे थे।
पुलिस ने चार लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया था। मुख्यमंत्री के निर्देश पर यह मामला एसटीएफ को सौंप दिया गया था। अब एसटीएफ ने लखनऊ से 14 फरवरी को पकड़े गए पीएफआई के कमांडर बदरुद्दीन को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया है।
बता दें कि पिछले दिनों लखनऊ में दो पीएफआई के सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद यूपी एसटीएफ ने पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के दिल्ली के शाहीन बाग स्थित दफ्तर पर छापा मारा था। इस दौरान एसटीएफ ने कई अहम दस्तावेज और पोस्टर बरामद किए हैं। इसमें बाबरी ढांचा ध्वंस से संबंधित पोस्टर भी मिले थे।
यूपी एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश ने बताया था कि हाथरस मामले में जातीय हिंसा की साजिश में गत वर्ष सितंबर में मथुरा में गिरफ्तार पीएफआई के चार सदस्यों के खिलाफ दर्ज केस को लेकर यह कार्रवाई की गई है। न्यायालय से सर्च वारंट मिलने के बाद की गई कार्रवाई में पीएफआई के सदस्यों के आपराधिक घटनाओं में शामिल होने की जानकारी मिली है। केरल के कई मामलों में भी उनकी भूमिका सामने आई है। इनमें एक स्कूल में लेक्चरर का हाथ काटने का मामला भी है।
हाथरस मामले को लेकर ईडी ने केरल से रऊफ शरीफ को गिरफ्तार किया था, लेकिन उसे केरल की स्थानीय अदालत ने जमानत दे दी थी। विदेश भागने की कोशिश में शरीफ को यूपी एसटीएफ ने केरल के एक एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया था और यूपी लाकर मथुरा में जिला सत्र न्यायालय में पेश किया था। रऊफ की निशानदेही पर राजधानी लखनऊ से दो लोगों को गिरफ्तार कर सीरियल ब्लास्ट की योजना को नाकाम कर दिया गया था।