पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति को हल्की धाराओं में तलब करने के सीजेएम के आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका को एमपीएमएलए कोर्ट ने मंगलवार को खारिज कर दिया। विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय ने सीजेएम के आदेश को सही मानते हुए किसी हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
पत्रावली के मुताबिक वादिनी नूतन ठाकुर ने तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रजापति के खिलाफ बेनामी संपत्ति को लेकर लोकायुक्त से शिकायत की थी। इसके चलते उन्हें प्रताड़ित कर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया। बाद में पूर्व मंत्री ने पुष्पा देवी और पूनम नाम की महिला के जरिये नूतन ठाकुर और उनके पति आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर के खिलाफ महिला आयोग में अर्जी देने के साथ ही बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज करा दी।
इस मामले में पुलिस ने 13 जुलाई 2015 को फाइनल रिपोर्ट लगाते हुए कहा था कि मुकदमा फर्जी था और उसे दर्ज कराने में महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष जरीना उस्मानी व अशोक पांडेय की संलिप्तता थी। क्योंकि इनके परिजनों को गायत्री प्रजापति ने खनन का पट्टा दिलवाया था। फिर पुलिस ने फर्जी मुकदमा दर्ज कराने के मामले की विवेचना की और सीजेेएम कोर्ट में चार्जशीट लगाई। इसमें बताया गया कि गायत्री ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर धोखाधड़ी, कूटरचना करते हुए साजिश के तहत फर्जी मुकदमा दर्ज कराया था।
सीजेएम कोर्ट ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते समय 31 जुलाई 2017 को धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं को हटाते हुए गायत्री प्रजापति को मिथ्या आरोप लगाने और साजिश रचने का आरोपी मानते हुए तलब कर लिया। राज्य सरकार ने सीजेएम कोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए एमपीएमएलए कोर्ट में याचिका दाखिल की। इस पर सुनवाई के बाद एमपीएमएलए कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। कहा, सीजेएम ने धाराएं घटाने में कोई गलती नहीं की है। उनका आदेश सही है।