लखनऊ में साइबर फिरौती का पहला मामला सामने आया है। शातिरों ने गोमतीनगर के विनयखंड निवासी जल निगम के इंजीनियर के बेटे शुभम मौर्या के पबजी गेम का पेज हैक कर लिया। इसके बाद पेज रीस्टोर करने के लिए छात्र को मेसेज भेजकर चार हजार रुपये फिरौती मांगी तो उसके होश उड़ गए।
रुपये न देने पर हैकर ने आपत्तिजनक पोस्ट शेयर करने की धमकी भी दी। छात्र ने अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी है। इस बीच हैकर ने शुभम के पेज पर सस्ते उत्पाद बेचने के विज्ञापन डालकर ठगी शुरू कर दी। इंस्पेक्टर राम सूरत सोनकर ने बताया कि साइबर सेल और आईटी विशेषज्ञों की मदद से जांच की जा रही है।
स्नातक कर चुके शुभम ने बताया कि वह परा स्नातक की पढ़ाई कर रहा है। उसने पबजी गेम खेलने के लिए इंस्टाग्राम पर पबजी नगर नाम से पेज बनाया था। इस पेज पर 10 हजार से अधिक सदस्य हैं। कुछ वॉट्सएप के जरिये उससे जुड़े थे।
आठ अगस्त को एक फालोअर ने वॉट्सएप पर मेसेज कर पबजी नगर पेज पर सस्ते उत्पाद के बारे में जानकारी मांगी। एक ने पूछा कि जो सामान बाजार में 15000 रुपये का है, उसे वह अपने पेज पर मात्र 2500 रुपये में बेचने का ऑफर कैसे दे रहा है।
पेज हैक कर बदला पासवर्ड
प्रतीकात्मक तस्वीर
यह सुनते ही शुभम के होश उड़ गए। उसने ऐसा कोई भी ऑफर न देने की बात कहते हुए अपना पेज चेक किया। हालांकि, पेज नहीं खुला। शुभम का कहना था कि हैकर ने उसका पेज हैक कर नाम व पासवर्ड बदल दिया था।
अब वह उसके पेज पर सदस्यों को सस्ते माल का झांसा देने वाले ऑफर पोस्ट कर रहा है। झांसे में आकर कई सदस्य ठगे भी जा चुके हैं। इस बीच हैकर ने शुभम के निजी इंस्टाग्राम अकाउंट पर मेसेज भेजकर पेज रीस्टोर करने व हैक हो चुके अकाउंट वापस करने के नाम पर 4000 रुपये मांगे।
दिल्ली में मुकदमा दर्ज होने की दी धमकी
हर घंटे यूजर नेम बदल रहा हैकर
शुभम ने बताया कि हैकर ने उसके पेज पबजी नगर में हेराफेरी कर इसी नाम से दूसरा पेज बनाया है। इसके माध्यम से ठगी कर रहे हैं। साथ ही हर घंटे पेज का यूजर नेम बदल रहे हैं।
शुभम ने बताया कि उसके पेज के जरिये किसी डीसीपी से ठगी की बात सामने आई है। उसने बताया कि बीते दिन किसी व्यक्ति ने फोन कॉल करके खुद को दिल्ली पुलिस का इंस्पेक्टर बताते हुए डीसीपी से ठगी होने की जानकारी दी।
कथित इंस्पेक्टर ने बताया कि डीसीपी ने उसके खिलाफ केस दर्ज कराया है। यह सुनते ही शुभम के होश उड़ गए। उसने पेज हैक होने की जानकारी दी, लेकिन कथित इंस्पेक्टर कुछ सुनने को तैयार नहीं हुआ। उसने जल्द लखनऊ आने की बात कही। हालांकि, उसके पेज के जरिए वाकई किसी डीसीपी को ठगा गया है या नहीं? जिस व्यक्ति ने फोन किया वह इंस्पेक्टर था या कोई ठग? इसकी पुष्टि नहीं हो पा रही है।