रायबरेली। जिले में बारिश नहीं हो रही है। जबकि आसपास के जिलों में झमाझम बारिश हो रही है। मौैसम विभाग के मुताबिक हवा का दबाव कमजोर पड़ने से ऐसा हो रहा है। साथ ही नमी का प्रतिशत बहुत अधिक हो गया है। झमाझम बारिश न होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। धान की फसल पिछड़ रही है।
मानसून आ गया है लेकिन अभी तक वह जोरदार तरीके से नहीं बरसा है। स्थितियां बारिश की बनती हैं लेकिन बादल बिना बरसे चले जाते हैं या फिर घुमड़ते रहते हैं। इस कारण उमस बढ़ी है। मंगलवार को पूरे दिन बादल छाए रहे लेकिन बारिश नहीं हुई। कुछ जगहों पर बूंदाबांदी जरूर हुई लेकिन खेती से लिहाज से यह नाकाफी रहा।
जिले में बादलों की आवाजाही 25 जून से हो रही है। इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में हल्की बारिश हुई लेकिन शहर में बारिश नहीं हुई। जुलाई का पहला सप्ताह बारिश के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण होता है, लेकिन बादल हैं कि वह बरस नहीं रहे हैं। इससे किसान बहुत परेशान हैं। धान की फसल लगातार पीछे हो रही है। कई जगहों पर किसान नलकूप के सहारे धान की रोपाई कर रहे हैं, इससे फसल की लागत भी बढ़ रही है।
हवा का रुख बदलने पर होगी बारिश
मौसम विभाग के जानकारों का कहना है कि जिले में हवा का दबाव हो गया है जिससे बारिश में देरी हो रही है। मंगलवार को अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री तथा न्यूनतम तापमान 27.2 डिग्री रहा। इंदिरा गांधी उड़ान अकादमी फुरसतगंज अमेठी के मौसम विशेषज्ञ दीतेंद्र सिंह का कहना है कि हवा का दबाव कमजोर होने से बारिश नहीं हो रही है। मानसून सक्रिय है। हवा का रुख बदलते ही बारिश होगी।
धान की रोपाई में देरी से किसान परेशान
हलोर (रायबरेली)। असाढ़ के महीने में भी बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। हालत यह है कि जिन किसानों की धान की रोपाई हो चुकी है, उनकी फसलें सूख रही हैं। क्षेत्र के कोटवा मोहम्मदाबाद, बारी गोहन्ना, पुरासी, कक्केपुर, भटसरा, अलीपुर आदि गांवों में धान की रोपाई का का काम शुरू हो गया है। क्षेत्र के किसान गंगासागर पांडेय, अंशुमान सिंह, मनोज मिश्रा, प्रवीण त्रिपाठी, श्रवण चौधरी, श्याम बहादुर सिंह, अमित सिंह आदि का कहना है कि धान की नर्सरी तैयार है, लेकिन मानसून आने के बाद भी बारिश नहीं हो रही है। जिससे किसानों के चेहरे पर मायूसी छाई हुई है।