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Lucknow News: ब्रेस्ट कैंसर में सिर्फ 15 फीसदी को कीमोथेरेपी की जरूरत

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लखनऊ। ब्रेस्ट कैंसर के सिर्फ 15 फीसदी मरीजों को ही कीमोथेरेपी की जरूरत होती है। इसके बाद भी गैर जरूरी कीमोथेरेपी किए जाने से मरीजों को सेहत के अलावा आर्थिक रूप से भी नुकसान हो रहा है। जबकि कीमोथेरेपी के विकल्प पूरी दुनिया में मौजूद हैं। सोमवार को सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) में निजी पैथोलॉजी लैब की संस्थापक डॉ. मंजिरी बाकरे ने अपने क्या हर ब्रेस्ट कैंसर रोगी को कीमोथेरेपी की आवश्यकता होती है? मेड इन इंडिया, नव-पद्धति परीक्षणों की निर्णय लेने में भूमिका विषय पर व्याख्यान में यह बात कही। उनका कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर के 95 फीसदी तक रोगी कीमोथेरेपी से गुजरे हैं। इससे होने वाले नुकसान और इसके संभावित विकल्प रोगनिदान परीक्षण पर विचार किया जाना चाहिए। उनकी खुद की कंपनी एक उत्पाद कैनअसिस्ट-ब्रेस्ट (सीएबी) पर काम कर रही है।उनका दावा है कि इससे 70 फीसदी तक ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों को फायदा पहुंचाया जा सकता है।
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आयोजन में सीडीआरआई की निदेशक डॉ. राधा रंगराजन ने कहा कि कोई भी प्रौद्योगिकी दुनिया के भविष्य को दर्शाती है। चाहे वह औषधि अनुसंधान हो या मानव संसाधन विकास के किसी भी क्षेत्र में काम हो। एक और विशेषज्ञ डॉ. धनंजय देंदुकुरी ने बताया कि कोविड के बाद की दुनिया में माइक्रोफ्लूडिक प्रौद्योगिकी की दिशा में तेजी से काम हो रहा है। ये सरल और सस्ती जांच के माध्यम के रूप में सामने आई हैं। इसमें मरीज के नमूने की बहुत ही कम मात्रा की आवश्यकता होती है।
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