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Lucknow News: कभी गूंजता था इंकलाब का नारा, आज छाई वीरानी

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श्रावस्ती। देश को आजाद कराने के लिए कभी भंगहा की इस हवेली में न सिर्फ रणनीति बनती थी, बल्कि यह हवेली इंकलाब के नारों से गुंजायमान रहती थी आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। सुरक्षा व संरक्षा के अभाव में पूर्व राज्यपाल सरदार जोगिंदर सिंह की यह हवेली अब खंडहर में तब्दील हो चुकी है।
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हरिहरपुर रानी ब्लाॅक मुख्यालय भंगहा के बगल खंडहर में तब्दील हो चुकी यह हवेली कभी इंकलाब के नारों से गूंजती थी। यह हवेली सरदार जोगिंदर सिंह की थी जो लोकसभा व राज्यसभा सांसद होने के साथ ही जन लेखा समिति व प्राकलन समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। 1962 में नेशनल राइफल एसोसिएशन के मानद महासचिव व कृषि आयोग के सदस्य रहने के साथ ही गृह समिति के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 1971-72 में ओड़ीशा व 1972 से 1977 तक राजस्थान के राज्यपाल थे।

देश को आजादी दिलाने के लिए श्रावस्ती व बहराइच के आजादी के मतवालों का यहां जमघट लगता था। एक तरफ हिमालय की शिवालिक पर्वत मालाओं, सुहेलवा, ककरदरी, हरदत्त नगर गिरंट व भिनगा के जंगल व दूसरी तरफ राप्ती नदी के बीच होने के कारण यहां अंग्रेजों के आने का डर कम रहता था। इस कारण अवध के आजादी के दीवाने अंग्रेजों से छिपने के लिए इसी हवेली में शरण लेते थे। आज जब देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, तब यह हवेली प्रशासनिक व राजनीतिक उपेक्षा की कहानी बयां कर रही है। (संवाद)
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बाक्स में-

सरदार जोगिंदर सिंह की हवेली के बारे में जानकारी नहीं थी। इसकी जांच कराकर, अगर कब्जा है तो उसे खाली कराने के साथ ही हवेली को सुरक्षित व संरक्षित कराया जाएगा।
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अजय कुमार द्विवेदी, डीएम
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