कोविड-19 का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन पहले के मुकाबले छह गुना ज्यादा संक्रामक है, इसलिए हर स्तर पर कहीं अधिक सावधानी बरतनी होगी। हालांकि इसके प्रसार की तीव्रता पर अभी भी मंथन हो रहा है। साथ ही यह कितना खतरनाक है, इसका अध्ययन भी जारी है। नया वैरिएंट विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार शोध के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि नये वैरिएंट पर पहले से मौजूद वैक्सीन का असर होगा या नहीं।
केजीएमयू के सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च के प्रोफेसर डॉ. शैलेंद्र सक्सेना के अनुसार ओमिक्रॉन वायरस का संक्रमितों के शरीर में सेल के साथ अटैचमेंट ज्यादा देखा गया है। यही वजह है कि यह ज्यादा समय तक मरीज के शरीर में रहता है तथा ज्यादा संक्रामक भी होता है। हालांकि ज्यादा संक्रामक होना ज्यादा तीव्र या खतरनाक होने की निशानी नहीं है। जैसा कि पहली लहर के दौरान वायरस का संक्रमण स्तर ज्यादा था, लेकिन यह उतना खतरनाक नहीं था। वहीं दूसरी लहर के दौरान इसके विपरीत स्थिति देखने को मिली। इसका संक्रमण स्तर भले कम था, लेकिन यह कहीं अधिक खतरनाक था। नया वैरिएंट छह गुना ज्यादा ताकतवर है, लेकिन यह कितना खतरनाक है, इसके बारे में अभी स्थिति साफ नहीं है।
कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति से हुआ म्यूटेट
प्रो. सक्सेना के अनुसार वायरस ने कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति के शरीर के भीतर अपने स्वरूप में बदलाव किया है। अनुमान है कि मई 2020 में वायरस म्यूटेट हुआ और इसके बाद उसी से वह अन्य में फैला। नया स्वरूप पहले के मुकाबले ज्यादा संक्रामक है, इसलिए सावधानी रखना बेहद जरूरी है।
वैक्सीन के बेअसर होने का कोई प्रमाण नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार नये वैरिएंट के बारे में अभी भी बहुत सीमित जानकारी है। इसपर वैक्सीन बेअसर है या नहीं, यह शोध का विषय है। नये वैरिएंट ने कमजोर इम्युनिटी वाले व्यक्ति में म्यूटेट किया है, इसलिए उनको ज्यादा सावधान रहना चाहिए।
एचआईवी-एड्स से पीड़ित व्यक्ति में मिला नया वैरिएंट
आईएमए के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. सूर्यकांत के अनुसार कोविड-19 का नया वैरिएंट साउथ अफ्रीका में एक एचआईवी-एड्स पीड़ित व्यक्ति में मिला था। जाहिर है कि कम प्रतिरोधक क्षमता वालों में इसका असर ज्यादा है। हालांकि टीके की दोनों डोज लगवाकर और कोविड प्रोटोकॉल का पालन कर इससे बचा जा सकता है।
सावधानी रखें
नये वैरिएंट से घबराने के बजाय सावधानी अधिक रखनी होगी। पहले से हाथ धोने, मास्क पहनने, छह फीट की दूरी रखने तथा टीकाकरण कराने के लिए कहा गया है। इनका पालन करते रहें, तो हर प्रकार के संक्रमण से दूर रहेंगे।
- डॉ. शैलेंद्र सक्सेना, प्रोफेसर, सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च, केजीएमयू
विदेश से लौटने पर आठ दिन का अनिवार्य क्वारंटीन
विदेश से आने वाले सभी यात्रियों को अब अनिवार्य रूप से आठ दिन क्वारंटीन रहना होगा। इससे पहले उनकी आरटीपीसीआर जांच की जाएगी। पहली रिपोर्ट निगेटिव आने के आठवें दिन एक फिर जांच होगी। रिपोर्ट सामान्य आने पर ही उन्हें बाहर निकलने की अनुमति होगी।
जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. मिलिंद वर्धन ने बताया कि नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए चिह्नित 14 देशों में से किसी की भी लखनऊ के लिए सीधी फ्लाइट नहीं है। फिर भी एहतियातन सभी विदेशी यात्रियों की जांच कराई जाएगी। इसके लिए फ्लाइट में अनाउंसमेंट किया जाएगा। सभी यात्रियों के बोर्डिंग पास पर स्टैंप भी किया जाएगा। यह प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
हालांकि इतने यात्रियों के लिए होल्डिंग एरिया बनाना संभव नहीं है। इसलिए जांच के बाद सभी को घर पर क्वारंटीन रहने की हिदायत के साथ रवाना किया जा रहा है। साथ ही अन्य जनपद के यात्रियों की सूचना संबंधित जिले में सीएमओ कार्यालय को दी जा रही है। जिला सर्विलांस अधिकारी के अनुसार, सितंबर में आखिरी बार कोई विदेशी यात्री संक्रमित मिला था।
घरेलू उड़ानों में 10 फीसदी यात्रियों की जांच
डीएम अभिषेक प्रकाश ने घरेलू उड़ानों में भी आरटीपीसीआर की रैंडम जांच करने का आश्वासन दिया है। घरेलू उड़ानों के कुल यात्रियों में से 10 फीसदी की आरटीपीसीआर जांच की जाएगी। सभी यात्रियों के नाम, मोबाइल नंबर, आने और जाने की जगह की भी जानकारी लेने का निर्देश स्वास्थ्य विभाग की टीमों को दिया गया है।