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हाईकोर्ट ने सख्ती से कहा- आधिकारी शहर में पटरी दुकानदारों का क्षेत्र तय करें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ Updated Sat, 25 May 2019 12:44 AM IST
Lucknow High Court
नो वेंडिंग जोन में पटरी दुकानें लगने और इसकी वजह से जाम आदि की समस्या उत्पन्न होने के मुद्दे पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने अधिकारियों को शहर में पटरी दुकानदारों का क्षेत्र तय करने और अनधिकृत स्थानों पर दुकानें न लगने देने के निर्देश दिए हैं। इस मुद्दे पर तीन माह में कार्यवाही किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने इस मामले में जिला प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों को नगर निगम को सहयोग करने को कहा है।

अदालत ने कहा इस कवायद के पूरा होने पर लखनऊ के जिलाधिकारी, पुलिस व नगर निगम के अफसर यह सुनिश्चित करेंगे कि नो वेंडिंग जोन में कोई भी दुकान न लगा सके। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 27 अगस्त नियत करते हुए कहा कि नगर निगम को तीन माह का समय दिया जाता है जिस अवधि में वह पटरी दुकानों के संबंध में दिए गए आदेशों पर अमल करे। कोर्ट ने अगली सुनवाई में इस पर होने वाले अमल की विस्तृत रिपोर्ट पेश दिए जाने के आदेश दिए।

न्यायमूर्ति मुनीश्वर नाथ भंडारी व न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की खंडपीठ ने यह आदेश लखनऊ, पटरी दुकानदार कल्याण समिति की याचिका पर दिए। याचिका में कहा गया कि नगर निगम ने पटरी दुकानदारों को लेकर वेडिंग व नॉन वेंडिंग जोन का प्रस्ताव जरूर दिया हुआ है पर अभी तक इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। 
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याचिका में कहा गया है कि पटरी दुकानदारों को लाइसेंस देने के लिए अभी तक विज्ञापन प्रकाशित नहीं किया गया न ही कोई प्रक्रिया की गई जिस वजह सेे दुकानदार लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। 

यह भी कहा गया कि आबादी के लिहाज से पटरी दुकानदारों की संख्या भी तय नहीं की जा रही है। नगर निगम की तरफ से यह स्वीकार किया गया कि नो वेंडिंग जोन में भी दुकानें लग रही है। इसकी रोकथाम में पुलिस द्वारा सहयोग न मिलने का कारण भी बताया गया।

इस पर अदालत ने नगर निगम को निर्देश दिए कि पटरी दुकानदारों को लाइसेंस जारी करने के लिए विज्ञापन प्रकाशित करा जाए। कोर्ट ने कहा कि यह विज्ञापन कम से कम दो प्रमुख अखबारों, जिनमें एक हिंदी भाषा का हो, में प्रकाशित कराया जाए। 

इसमें आवेदन की अंतिम तिथि का भी स्पष्ट उल्लेख किया जाए। कोर्ट ने कहा कि इस बात का ध्यान रखा जाए कि इन अखबारों का लखनऊ में प्रसारण हो। अदालत ने निगम के अधिकारियों को आदेश दिया कि आने वाले आवेदनों की जांच की जाए और जिस स्थान पर दुकान लगाने के लिए आवेदन किया गया है उसे भी देखा जाए। 

कोर्ट ने कहा कि अगर किसी क्षेत्र में दुकानदारों की संख्या अधिक हो रही है तो उनको समीप के किसी स्थान पर समायोजित किया जाए। अदालत ने कहा कि नगर निगम के अधिकारी वेंडिंग व नॉन वेंडिंग जोन को घोषित करने से पहले उन स्थानों का सर्वे करें। जो लाइसेंस जारी किए जाएं उस पर यह स्पष्ट होना चाहिए कि आवेदक दुकानदार को किस स्थान पर बैठना है।
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