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बीमार होने के बाद भी ड्यूटी पर बुलाई गई नर्स,नर्सिंग कर्मियों में आक्रोश

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लखनऊ। केजीएमयू प्रशासन की नाकामी एक बार फिर सामने आई है। ड्यूटी पर आने के बाद पॉजिटिव पाई गई नर्स की तबीयत 21 अप्रैल से ही खराब थी। इसके बाद भी उसे फोन करके ड्यूटी पर बुला लिया गया। इसे लेकर नर्सिंग कर्मियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि तबीयत खराब होने की जानकारी देने के बाद भी नर्स को बुलाया जाना जानबूझकर तमाम कर्मचारियों की जान को जोखिम में डालना है। रविवार को तबीयत खराब होने के बाद भी स्टाफ नर्स को बुलाए जाने की जानकारी अन्य नर्सिंग कर्मियों को मिली तो उन्होंने आक्रोश जताया है। नर्सिंग कर्मियों का कहना है कि जो लोग भी बीमारी की बात करते हैं और मेडिकल लगाते हैं उन्हें तरह-तरह से परेशान किया जा रहा है। खास बात यह है कि मेडिकल देने वालों का परीक्षण करने के लिए लगी टीम में नॉन क्लीनिकल विभागों के डॉक्टर को रखा गया है। नर्सिंग कर्मियों ने मांग की कि उनकी ड्यूटी रोस्टर के हिसाब से लगाई जाए। यदि नर्सिंग कर्मियों को एक दिन का अवकाश देकर डबल शिफ्ट की ड्यूटी कराई जाए तो वह आसानी से कर भी सकते हैं और कोरोना के फैलाव में कमी आएगी।  नौकरी जाने के डर से नर्स आई थी ड्यूटी पर क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में कार्यरत स्टाफ नर्स ने 21 अप्रैल की रात ड्यूटी के दौरान खुद की तबीयत खराब होने की जानकारी दी थी। उसके साथियों की माने तो रात में करीब 10 बजे उसने दवाएं भी खाई थीं। इसके बाद वह अपने चैंबर में जाकर बैठ गई थी। सुबह 8 बजे ड्यूटी खत्म करने के बाद जाते वक्त भी उसने कहा था कि उसकी तबीयत ठीक रही तभी ड्यूटी पर आएगी। अगले दिन ड्यूटी पर नहीं आई। धीरे-धीरे दो दिन बीत गए लेकिन वह नहीं लौटी। 24 अप्रैल दोपहर बाद उसे फोन किया गया और ड्यूटी पर आने के लिए कहा गया। बताया जाता है कि नर्स ने फोन करने वाले को सूचना दी कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है। उसने यह भी बताया कि बुखार के साथ उसमें कोरोना जैसे लक्षण दिख रहे हैं। वह दवाएं खा रही है लेकिन बुखार उतर नहीं रहा है। ऐसी स्थिति में नर्स को यह संदेश दिया गया कि यदि वह ड्यूटी पर नहीं आती है तो उसकी नौकरी भी खतरे में पड़ सकती है। आखिरकार नौकरी बचाने के लिए नर्स 25 अप्रैल को शाम 8 बजे वार्ड में हाजिर हो गई। हालांकि गनीमत यह है कि वार्ड में आते ही उसने वहां मौजूद वार्ड प्रभारी को बता दिया कि उसे लगातार बुखार है। यह सुनते ही रेजिडेंट डॉक्टरों ने सावधानी बरती और तत्काल उसे संक्रामक रोग यूनिट में भेज दिया। जहां क्वारंटीन कर दिया गया और सैंपल लिए गए। कोरोना को लेकर ट्रॉमा सेंटर में पहले भी बवाल हो चुका है। 13 अप्रैल को एक डॉक्टर की सिफारिश पर यहां भर्ती कराया गया बुजुर्ग पॉजिटिव निकला था। ऐसे में ट्रॉमा सेंटर में कार्यरत 56 चिकित्सक व चिकित्सा कर्मियों को क्वारंटीन करना पड़ा था। हालांकि बाद में किसी की रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई तो सिर्फ 20 लोगों को क्वारंटीन किया गया, अन्य को ड्यूटी पर ले लिया गया था। अब एक बार फिर स्टाफ नर्स के मामले में भी ट्रॉमा सेंटर सुर्खियों में आ गया है।   लापरवाही नहीं की गई सभी की ड्यूटी तय होती है। नर्स के वार्ड में आते ही उसे ट्रायग में भेज दिया गया था। लापरवाही नहीं हुई है। हर स्तर पर सावधानी बरती गई। फिर भी इन पहलुओं की केजीएमयू प्रशासन समीक्षा करेगा। डॉ. सुधीर कुमार सिंह, मीडिया प्रभारी केजीएमयू
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