रायबरेली। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को जिले में किस तरह से कर्मचारी कैश करा रहे हैं इसका ताजा उदाहरण जिले में देखने को मिला है। कहने को तो जिला अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर संचालित डायलिसिस यूनिट में सुविधाएं मुफ्त हैं लेकिन फिर भी यहां प्रति रोगी 1500 का बिल तैयार कर लिया जाता है। मजे की बात तो ये कि मरीजों कि को दवा दी नहीं जाती लेकिन इसका भी बिल क्लेम में चिपका दिया जाता है। मामले में सीएमओ ने रिपोर्ट तलब की है।
जिला अस्पताल में डायलिसिस कराने के लिए आ रहे कैशलेस योजना के लाभार्थियों को दवा उपलब्ध न कराने का मामला गरमा गया है। यूनिट में सामान्य व कैशलेस योजना के सभी मरीजों की डायलिसिस के दौरान लगने वाली दवाओं की व्यवस्था डीसीडीसी किडनी केयर को करने के निर्देश हैं। यूनिट पर पर्याप्त दवाएं भी उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है।
पूर्व में डायलिसिस कराने के लिए आने वाले आयुष्मान भारत योजना के मरीजों को जिला अस्पताल प्रशासन की ओर से दवाएं मुहैया कराकर कैशलेस योजना के तहत प्रति मरीज 1500 रुपये का भुगतान लेने के लिए क्लेम लिया गया। नए सीएमएस ने कैशलेस योजना के मरीजों को दवाएं देने से मना कर दिया है। इसके बाद भी कैशलेस योजना के तहत 1500 रुपये प्रति रोगी क्लेम किया जा रहा है।
जिला अस्पताल में पीपीपी मॉडल पर डायलिसिस यूनिट संचालित है। प्रधानमंत्री जन आरोग्य के मरीजों के साथ ही अन्य सभी मरीजों की फ्री डायलिसिस के लिए दवाएं सरकार उपलब्ध कराती है। यदि कैशलेस योजना के तहत अस्पताल क्लेम ले रहा था तो इसके बारे में कुछ नहीं बता सकते हैं।
नोमान, जनरल मैनेजर-डीसीडीसी किडनी केयर
डायलिसिस यूनिट का संचालन कर रही डीसीडीसी किडनी केयर के जनरल मैनेजर से बात की गई। कैशलेस योजना या अन्य मरीजों की फ्री डायलिसिस की व्यवस्था यूनिट में हैं। मरीजों को बिना दवा उपलब्ध कराए जिला अस्पताल द्वारा योजना के तहत क्लेम लेने के संबंध में पूरी रिपोर्ट मांगी गई है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ