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Lucknow News: 88 गांवों में खरीद रहे हैं जमीन तो नगर निगम से लें एनओसी

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प्रवेंद्र गुप्ता
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लखनऊ। नगर निगम सीमा में साल 2019 में आए 88 गांवों में अगर आप आशियाना बनाने का सपना देख रहे हैं, तो जमीन खरीदने से पहले नगर निगम से अनापत्ति प्रमाणपत्र जरूर ले लें। क्योंकि, बिल्डर और प्रॉपर्टी डीलर नगर निगम की सरकारी जमीन तक बेच दे रहे हैं। जांच में मामला सही पाए जाने पर उनपर बुलडोजर चल रहा है। अनापत्ति प्रमाणपत्र लेने से आप किसी झांसे में आकर अपनी गाढ़ी कमाई गंवाने से बच सकेंगे। नगर निगम प्रशासन इस बाबत सार्वजनिक नोटिस भी जारी करने जा रहा है।



नगर निगम के विस्तारित क्षेत्रों के गांवों में प्राॅपर्टी डीलरों का धंधा तेजी से बढ़ा है। कॉलोनियां बसाकर मकान और प्लाॅट बेचे जा रहे हैं। इन सबको एलडीए से पास भी नहीं किया जा रहा है। ऐसे में यह सब काम अवैध रूप से हो रहा है। बिल्डर व प्रॉपर्टी डीलर भविष्य के सपने दिखाकर लोगों को न केवल फंसा रहे हैं, बल्कि जमीन की कीमतें भी बढ़ा दिए हैं।
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इसलिए फंसते हैं लोग



जमीन नगर निगम क्षेत्र में है....जल्द ही सारी सुविधाएं आने वाली हैं



बिल्डर जरूरतमंदों को पहला झांसा यही देते हैं कि उनकी जमीन नगर निगम क्षेत्र में है। जल्द ही क्षेत्र में पानी, सीवर और सड़क की सुविधाएं आने वाली हैं। कम कीमत में बेहतर सुविधाएं मिलने की आस में लोग फंस जाते हैं।



जमीन सस्ती होने का लालच...



एलडीए और आवास विकास की नई आवासीय योजनाएं भी लंबे अरसे से नहीं आई हैं। वहीं, एलडीए और आवास विकास की पुरानी कॉलोनियोंं में रीसेल में मिल रहे भूखंडों की अपेक्षा विस्तारित क्षेत्र के गांवों के भूखंड कई गुना सस्ते होते हैं। सस्ते का लालच ही है कि विस्तारित क्षेत्रों में अवैध कब्जे और प्लाॅटिंग के मामले फल-फूल रहे हैं।







तहसीलों ने नहीं दिए रिकाॅर्ड, दबाया जा रहा अवैध कब्जों का राज



तहसीलों ने अब तक विस्तारित क्षेत्रों के रिकॉर्ड नगर निगम को नहीं दिए हैं। जानकार मानते हैं कि इसी वजह से इन क्षेत्रों में सरकारी जमीन बिक रही हैं। वे बताते हैं कि तहसीलों के रिकॉर्ड नहीं देने के पीछे बड़ी मंशा कर्मचारियों के सांठगांठ और भ्रष्टाचार को छिपाना है। रिकाॅर्ड मिल गए, तो यह जांचना आसान हो जाएगा कि कितनी जमीन प्राॅपर्टी डीलर उनकी सांठगांठ से बेच चुके हैं। विस्तारित क्षेत्रों की कुछ जमीन के ऐसे भी मामले सामने आ चुके हैं जिन्हें तहसील कर्मियों ने बिना नगर निगम की एनओसी के बिल्डरों को सौंप दी थी। इसको लेकर करीब छह महीने पहले विवाद भी खड़ा हुआ था। इसके बाद जमीन के कई मामलों में आदेश निरस्त भी किए गए। इससे साफ है कि बिल्डरों-प्रॉपर्टी डीलरों से मिलीभगत करने वाले कर्मचारियोंं की वजह से जरूरतमंद ठगी का शिकार हो रहे हैं।







विस्तारित सीमा में हैं ये गांव, जांच के बाद खरीदें जमीन



जेहटा, मौरा, सैंथा, अलीनगर, घैला, अल्लूनगर डिगुरिया, मुतक्कीपुर, रायपुर, नौबस्ता कला, धावा, गणेशपुर, रहमानपुर, सेमरा, उत्तरधौना, शाहपुर, सराय शेख, टेरा खास, निजामपुर मल्हौर, लौलाई, हासेमऊ, भरवारा (अवशेष), खरगापुर, भैंसोरा, लोनापुर, चंदियामऊ, मकदूमपुर, मलेशेमऊ, बाघामऊ, नरौना, सलेमपुर पतौरा, सिकरौरी, लालनगर, सराय प्रेमराज, महिपतमऊ, ककौली, हुसडिय़ा (अवशेष), सरसवां, अरदौनामऊ, अहिमामऊ, हरिहरपुर, मलाक, मुजफ्फरनगर घुसवल, यूसुफ नगर उर्फ बगियामऊ, निजामपुर मझिगवां, देवामऊ, सेवई, घुसवल कला, बरौली खलीलाबाद (अवशेष), अलीनगर सुनहरा (अवशेष), सरोसा भरोसा, हसनपुर खेवली, अलीनगर खुर्द, बिरूरा, बरौना, नरहरपुर, तिवारीपुर, भिठौली खुर्द, मोहिउद्दीनपुर, खरगापुर जागीर, सैदपुर जागीर, मिर्जापुर, रसूलपुर कायस्थ, अजनहर कलां, मिश्रपुर, गुडंबा, बरखुरदारपुर, आधार खेड़ा, बसहा, दसौली, मोहम्मदपुर मजरा, रसूलपुर सादात, गोयला, चककंजेहरा, माढरमऊ कला, माढरमऊ खुर्द, सोनई कंजेहरा, हरिकंशगढ़ी, पुरसेनी, मस्तेमऊ आदि।
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एनओसी के साथ ही नक्शा पास है या नहीं, यह भी देखें



नगर निगम के संपत्ति अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री बताते हैँ, विस्तारित क्षेत्रों में अवैध प्लॉटिंग बढ़ी है। इसको देखते हुए नगर निगम से एनओसी लेने के लिए सार्वजनिक नोटिस जारी किया जा रहा है। जमीन खरीदने से पहले एनओसी ले लेंगे तो सारी हकीकत पता चल जाएगी। इसके साथ ही एलडीए से भी जानकारी कर लें कि प्लॉटिंग करने वालों ने मानचित्र पास कराया है कि नहीं।
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