लखनऊ। गोमती पर नया पक्का पुल बनाने की योजना अभी तक कागज पर ही है। अब तो पुल बनने को लेकर भी संशय है, क्योंकि हाईकोर्ट से राहत पाने के लिए चार महीने पहले की गईं बड़ी-बड़ी बातें हवा में ही हैं।
लोक निर्माण विभाग से लेकर सेतु निगम तक को नहीं पता है कि पुल बनेगा कब और इसके लिए बजट कहां से आएगा। जिम्मेदार विभाग अब यह भी कहने से बच रहे हैं कि नया पक्का पुल बनेगा। इनका कहना है कि प्रस्ताव ही मंजूर नहीं हुआ तो कैसे कह दें कि पुल बनेगा।
गोमती पर 110 साल पहले बने पक्का पुल के कमजोर होने की जानकारी के बाद लोक निर्माण विभाग ने दिसंबर में इस पर आवागमन बंद कर दिया था। आईआईटी रुड़की की टीम की एक सप्ताह तक चली जांच के बाद पुल हल्के वाहनों के लिए खोला गया। केंद्रीय सड़क अनुसंधान संगठन ने भी पुल को कमजेार बताया था। इससे खतरे को लेकर हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई चल रही थी। लोक निर्माण विभाग ने जांच रिपोर्ट दाखिल कर बताया था कि पुल कमजोर हो गया है। अब नया पक्का पुल बनाने की जरूरत है, जिसके लिए सेतु निगम को पत्र भेजा गया है। यह भी बताया कि लोक निर्माण विभाग व सेतु निगम के अफसरों ने मौके का दौरा भी किया है। तय हुआ कि सात मीटर चौड़ा नया पुल डालीगंज की ओर नदी के डाउन स्ट्रीम पर बनेगा। पुराने पुल की मरम्मत और नए पुल बनाने की उम्मीद जताने के बाद लोक निर्माण विभाग को कोर्ट से राहत मिल गई। हालांकि, इसके चार महीने बाद भी न तो पुराने पुल की मरम्मत शुरू हुई और न ही पुल की डीपीआर बन सकी।
चार महीने से बंद है भारी वाहनों का आवागमन
पक्का पुल कमजोर होने की रिपोर्ट आने के बाद लोक निर्माण विभाग ने दिसंबर से इस पर से भारी वाहनों का आवागमन बंद कर दिया। इनका लोड कुड़ियाघाट की ओर से आठ साल पहले शुरू किए गए पुल पर आ गया है। लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता मनीष वर्मा का कहना है कि पुराने पक्का पुल की मरम्मत और नए पुल के निर्माण को लेकर सेतु निगम को पत्र भेजा जा चुका है। पुल कब बनेगा यह वही जाने। इससे लोक निर्माण विभाग का कोई लेना-देना नहीं है। उधर, सेतु निगम के महाप्रबंधक के संदीप गुप्ता का कहना है कि पुल की कार्ययोजना ही स्वीकृत नहीं है तो क्या कहें कि यह कब बनेगा और कितना बजट खर्च होगा। जब स्वीकृति मिलेगी तो डीपीआर बनेगी। लोक निर्माण विभाग के पत्र की जानकारी नहीं है।