देशभर के सरकारी अस्पतालों की स्कैन एंड शेयर मॉडल के आधार पर हुई रैंकिंग में टॉप 10 अस्पतालों में यूपी के नौ अस्पताल शामिल हैं। इन अस्पतालों में कम समय में पर्चा बनने की प्रणाली लागू है। इस उपलब्धि के लिए उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विभाग के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि इसी तरह एकजुटता बनी रही तो यूपी की स्वास्थ्य सेवाएं एक दिन देश में नंबर वन होंगी।
प्रदेश के अस्पतालों को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (एबीएचए) एप से जोड़ा गया है। इस एप को डाउनलोड करने पर मरीज का नाम, पता, मोबाइल नंबर आदि दर्ज करना पड़ता है। इसके प्रयोग के लिए अस्पतालों में विभिन्न स्थानों पर क्यूआर लगाए गए हैं। यदि आपके मोबाइल में यह एप पहले से है तो क्यूआर कोड स्कैन करने पर एक नंबर मिलता है। यह हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम से भी जुड़ा है। ऐसे में जब मरीज पर्चा काउंटर पर जाएगा तो उसे अपना नाम, पता आदि बताने के बजाय सिर्फ एप पर मिला नंबर बताना होगा। पर्चा काउंटर पर बगैर फॉर्म भरे उस नंबर को बताते ही तत्काल पर्चा बन जाता है। यानी काउंटर पर मरीज को सभी बातें नहीं बतानी पड़ती हैं। इस व्यवस्था के मूल्यांकन के लिए देशभर के सरकारी अस्पतालों की स्कैन एंड शेयर मॉडल के आधार पर की गई रैंकिंग में टॉप टेन अस्पतालों में सिर्फ छत्तीसगढ़ के रायपुर एम्स को स्थान मिल पाया है। अन्य सभी अस्पताल यूपी के हैं। इनमें यूएचएम हॉस्पिटल (कानपुर नगर), कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय (कानपुर), लोकबंधु अस्पताल (लखनऊ), तेज बहादुर सप्रू हॉस्पिटल (प्रयागराज), बाबू ईश्वर शरण जिला अस्पताल (गोंडा), जिला पुरुष चिकित्सालय (आजमगढ़), जिला पुरुष चिकित्सालय (गोरखपुर), मोती लाल नेहरू डिवीजनल अस्पताल (प्रयागराज) एवं बलरामपुर अस्पताल (लखनऊ) शामिल हैं।
टीम भावना से मिली कामयाबी
स्वास्थ्य विभाग की इस उपलब्धि पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि यह सभी के संयुक्त प्रयास का नतीजा है। प्रदेश स्वस्थ एवं उत्तम प्रदेश बनने की राह पर है। स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में लगातार सुधार आ रहा है। एक जिला-एक अस्पताल, योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। लोगों को उनके जिले में ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं। पीपीपी मॉडल पर भी अस्पतालों की नींव रखी जा रही है। आमजन को उच्च कोटि की स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।