लखनऊ में एसटीएफ व पीजीआई पुलिस ने एल्डिको कॉलोनी में रिटायर्ड कैप्टन व ओरियंटल बैंक ऑफ कामर्स के चीफ मैनेजर राकेश सिंह राठौर के घर लूट का खुलासा करते हुए रविवार को नौ बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से दो सफारी गाड़ी, लूट का सामान व वारदात में इस्तेमाल होने वाला सामान भी बरामद किया है।
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आईजी एसटीएफ अमिताभ यश ने बताया कि पकड़े गए बदमाशों में गिरोह का सरगना गुमान सिंह, अनिल कुमार वर्मा, अजीत यादव, मोरधन पारदी, केवल पारदी, नागेश्वर पारदी, जीतू पारदी, संतोष पारदी और सोनू राय शामिल हैं।
इसमें अनिल वर्मा, अजीत व सोनू राय झांसी के है। जबकि बाकी छह बदमाश मध्यप्रदेश के गुना जिले के रहने वाले हैं। यह जानजाति मध्यप्रदेश के गुना जिले में पांच गांवों में पाई जाती है। एसटीएफ व पीजीआई पुलिस ने अंबेडकर विश्वविद्यालय के पास से दो एसयूवी के साथ बदमाशों को धर-दबोचा था।
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सिर्फ कृष्णपक्ष में ही करते हैं वारदात
एसओ पीजीआई बृजेश कुमार राय ने बताया कि यह गिरोह सिर्फ कृष्णपक्ष में वारदात करता है। बदमाशों ने पूछताछ में बताया कि कृष्ण पक्ष में रात काफी घनी होती है। इस दौरान आसानी से वारदात देकर निकल जाते हैं। चोरी व डकैती का तरीका भी उत्तर प्रदेश के बावरिया गिरोह की तरह है। परिवार के सभी सदस्य वारदात में शामिल होते हैं। पुरुष जहां वारदात करते हैं वहीं, महिलाएं लूट का सामान बेचने का काम करती हैं। नकदी सभी में बराबर बांटी जाती है।
दिन में रेकी और रात में वारदात
एसओ के मुताबिक, बदमाश 10-12 की संख्या में निकलते हैं। इसमें महिलाएं व बच्चे भी शामिल होते हैं। गिरोह दिन में कॉलोनियों व मोहल्लों में घूमकर रेकी करता है। इसके बाद स्थानीय निवासियों से जानकारी जुटाने के बाद रात में वारदात अंजाम देकर निकल जाते थे।
तीर्थ यात्रा के नाम पर करते थे गाड़ी की बुकिंग
एसओ के मुताबिक, गुना के पांच गांवों पूरे बालाजी, बिला खेड़ी, चरबिला खेड़ा, कनारी खेड़ा व एक अन्य गांव में ढाई हजार से 20 लाख रुपये तक के इनामी बदमाश हैं। गैर जिलों में वारदात देने के लिए गिरोह तीर्थ यात्रा के नाम दो या तीन गाड़ी बुक करता है। पॉश कॉलोनियों को टारगेट कर आसपास के ढाबे पर गाड़ी खड़ी कर देते हैं। कार के ड्राइवर को इंतजार करने की बात कह मंदिर के बहाने रेकी करते हैं।
कुत्तों पर भी पा लेते हैं काबू
एसओ के मुताबिक, पारदी गिरोह कुत्तों पर काबू पाने के लिए गुलेल रखता है। गुलेल से कुत्तों के गले पर कीला पत्थर मारते हैं। इसके बाद कुत्ते भौंकना बंद कर देते हैं। इसके बाद गिरोह वारदात कर आसानी से भाग जाता है।
गिरोह को गिरफ्तार करने वाली टीम
गिरोह को दबोचने में एसओ पीजीआई बृजेश कुमार राय, एसआई अनिल कुमार, सतीश कुमार, एसटीएफ एसआई बृजेंद्र मिश्रा, कांस्टेबल इंद्रपाल वर्मा, प्रवीण कुमार, राहुल शुक्ला, चंद्रा मिश्रा, राजू सिंह, दिलीप यादव, अरविंद अवस्थी व वीर प्रसाद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आईजी एसटीएफ ने बताया कि राकेश सिंह राठौर गुड़गांव में तैनात हैं। परिवार में पत्नी रेखा, बेटा आदित्य व अभय हैं। 31 मई की रात करीब 12 बजे आदित्य अपने दोस्त के घर पार्टी से लौटा और रात ढाई बजे तक पढ़ाई करने के बाद सो गया। करीब चार बजे नींद खुली तो कमरा बाहर से बंद था। पीछे के दरवाजे से वह आंगन में पहुंचा और मां व भाई को जगाया।
दूसरे कमरे का दरवाजा खोला तो पाया कि सारा सामान बिखरा पड़ा था। सामान के साथ बदमाश रिटायर्ड कैप्टन की कार भी ले गए थे। रात करीब 3.54 बजे भागते वक्त बदमाश कॉलोनी के गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गए। पुलिस ने इसके साथ वारदात की दो दिन पहले की भी फुटेज खंगाली।
उन्नाव टोल प्लाजा के पास मिली थी चोरी गई कार
बदमाशों ने रिटायर्ड कैप्टन के घर से दस लाख के जेवर, दोनाली बंदूक, 20 कारतूस, एक लाख कैश, लैपटॉप व कार पार की थी। वारदात के 11 दिन बाद रिटायर्ड कैप्टन की कार उन्नाव टोल प्लाजा के पास पंक्चर बनाने की दुकान पर लावारिस खड़ी मिली थी। इसे पीजीआई पुलिस ने बरामद कर लिया था।
यह सामान हुआ बरामद
पुलिस ने बदमाशों के पास से दो एसयूवी, पांच मोबाइल, सात हजार रुपये, एटीएम कार्ड, पैन कार्ड, पिट्ठू बैग, वायर कटर, गुलेल, कीला पत्थर की गोलियां व सेल बरामद किए।