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मुसलमान किधर, सबकी नजर: सभी दलों के अपने-अपने दावे, मुस्लिम मतदाताओं को अभी से रिझाने का प्रयास

Tue, 27 Jun 2023 04:38 AM IST
Digvijay Singh अजित बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ

सार

हर पार्टी करीब 20 फीसदी अल्पसंख्यक आबादी को अपने-अपने तरह से रिझाने और लुभाने का प्रयास कर रही है। कौन-कितना सफल होता है, यह तो नतीजे ही बताएंगे।
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मुस्लिम मतदाता (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दलों की तैयारियां आहिस्ता-आहिस्ता आगे बढ़ रही हैं। क्या पक्ष और क्या विपक्ष, सभी की नजर मुस्लिम मतदाताओं पर है कि उनका रुख क्या होगा। हर पार्टी करीब 20 फीसदी अल्पसंख्यक आबादी को अपने-अपने तरह से रिझाने और लुभाने का प्रयास कर रही है। कौन-कितना सफल होता है, यह तो नतीजे ही बताएंगे।

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अपने भाग्य का खुद विधाता बनना चाहता है मुसलमान : मौलाना शहाबुद्दीन
बरेलवी इदारे के आलिम और ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन कहते हैं कि पढ़े-लिखे मुसलमान राजनीतिक सोच के साथ आगे आ रहे हैं। वे अपना हक चाहते हैं। आज विपक्षी गठबंधन में जो दल शामिल हो रहे हैं, उनमें से अधिकतर अपनी सहूलियत के हिसाब से कभी न कभी भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा रहे हैं। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने भी सत्ता के लिए विवादित ढांचा गिराने का श्रेय लेने वाले कल्याण सिंह को अपने साथ लिया। आज का मुसलमान सोच रहा है कि क्या वह खुद अपने भाग्य का विधाता नहीं बन सकता है। हम लखनऊ और दिल्ली में इन मुद्दों को लेकर मुसलमानों की महापंचायत करेंगे, ताकि सब खुलकर बोलें और आने वाले वक्त के लिए निर्णय लें।


 

अलग होगा पसमांदा समाज का निर्णय
पसमांदा जातियों के बीच यू-ट्यूब चैनल के जरिये काम कर रहे अब्दुल्लाह मंसूर कहते हैं कि खुद को धर्म निरपेक्ष कहने वाली पार्टियों ने कभी अपने मंच से पसमांदा मुसलमानों का जिक्र नहीं किया। पसमांदा समाज की कई जातियां अपनी सामाजिक-आर्थिक व भौगोलिक स्थिति के कारण एससी-एसटी का दर्जा पाने की पूरी हकदार हैं, जोकि आज तक नहीं मिला है। पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पसमांदा मुसलमानों का जिक्र किया है। अगर यह सिलसिला आगे बढ़ा तो पसमांदा समाज भाजपा के साथ जाने में कोई गुरेज नहीं करेगा।

 

जो नुमाइंदगी देगा, मुसलमान उसी के साथ : फरंगी महली
मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली कहते हैं कि आज का मुसलमान किसी के पीछे-पीछे चलने वाला नहीं रह गया है। जो अपने घोषणापत्र में उनके हक की बात करेगा और साथ ही आबादी के हिसाब से नुमाइंदगी भी देगा, मुसलमान उसी के साथ जाएगा।

 

क्या भाजपा मुस्लिमों को देगी टिकट : प्रो. संजय गुप्ता
लखनऊ विवि में राजनीति शास्त्र के प्रो. संजय गुप्ता कहते हैं कि परंपरागत तौर पर यह माना जाता है कि मुसलमान उस ओर जाते हैं, जो भाजपा को हरा सकता हो। अब भी काफी हद तक यह बात सही है। लेकिन, मुसलमानों के बीच एक तबका ऐसा भी है, जो अब भाजपा को अछूत नहीं मान रहा है। हालांकि, यह तबका सिर्फ बातों या विकास योजनाओं के लाभ से भाजपा की तरफ नहीं जाएगा, बल्कि वो भाजपा से टिकटों में भी भागीदारी चाहेगा। नगर निकाय चुनाव में मुसलमानों को टिकट देकर भाजपा ने छोटे रूप में यह प्रयोग किया भी है। वहीं, मुसलमानों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर भाजपा की लाइन को उचित नहीं मानता है। जाहिर है कि ऐसे मुसलमान संभावित विपक्षी गठबंधन का रुख करेंगे।

 
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भाजपा के खिलाफ मजबूत विकल्प को चुनेगा: डॉ. लक्ष्मण यादव
दिल्ली विवि के शिक्षक और समकालीन यूपी के विश्लेषक डॉ. लक्ष्मण यादव कहते हैं कि लोकसभा चुनाव में मुसलमान उस विकल्प को चुनना चाहेगा, जो भाजपा का मुकाबला करने में सक्षम हो। राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन के प्रयास सफल हुए तो मुसलमानों पर यह अच्छा मनोवैज्ञानिक प्रभाव डाल सकता है।
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