मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रूपाली सक्सेना ने सीतापुर नगर पालिकाध्यक्ष व पूर्व सपा विधायक राधेश्याम जायसवाल को एक महिला को जानमाल की धमकी देने व गाली-गलौज कर बेइज्जत करने का दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उन पर छह हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। अभियोजन पक्ष की ओर से इस मुकदमे की पैरवी अभियोजन अधिकारी राम चरनलाल ने की। मामला सितंबर 2007 का है।
बताते हैं कि नगर के गुरुद्वारा गली में सुंदरम ब्यूटी पार्लर चलाने वाली रुचि अग्रवाल ने 7 सितंबर 2007 को तत्कालीन नगर विधायक राधेश्याम जायसवाल व अपने पार्लर की ही एक महिला कर्मचारी के भाई पीयूष के विरुद्ध सरकारी कार्य में बाधा करने व जानमाल की धमकी दिए जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
वादिनी के मुताबिक दुकान में हुई चोरी की घटना की जांच को वह 6 सितंबर 2007 को कोतवाली स्थित महिला प्रकोष्ठ के दफ्तर में गई थी। महिला प्रकोष्ठ की उपनिरीक्षक द्वारा पूछताछ के दौरान ही राधेश्याम जायसवाल, पीयूष के साथ आ गए और तेज आवाज में प्रार्थिनी को धमकाते हुए उसके साथ बदसुलूकी करने लगे।
रुचि ने इसका विरोध किया तो वे गालियां देने लगे। इस मामले की रिपोर्ट अगले दिन रुचि द्वारा दर्ज कराई गई। जिस पर विवेचना करते हुए पुलिस ने नगर विधायक सहित दोनों आरोपियों के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र प्रेषित किया।
साक्ष्य के आधार पर सीजेएम ने राधेश्याम जायसवाल को सरकारी कामकाज में बाधा के आरोप से तो मुक्त कर दिया, लेकिन उन्हें धमकी व गाली-गलौज करने का दोषी पाया। सीजेएम ने इस मामले में उन्हें दो वर्ष के साधारण कारावास व छह हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साक्ष्य के अभाव में पीयूष पर कोई मामला नहीं बना।