नगर निकाय के मतदाता घर बैठे वोटर लिस्ट में अपना वोट चेक कर सकते हैं। राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी वेबसाइट पर यह व्यवस्था दी है। हालांकि अब नई वोट बनवाने या मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का समय समाप्त हो गया है।
नगर निकाय चुनाव की मतदाता सूची को अंतिम रूप दे दिया गया है। 60 निकायों में 17 महापौर, 1420 पार्षद, नगर पालिका के 199 अध्यक्ष, 5327 सदस्य, नगर पंचायत के 544 अध्यक्ष एवं 7178 सदस्य यानी सभी में कुल 14684 पदों पर यह चुनाव हो रहा है। पहले चरण में 37 जबकि दूसरे चरण में 38 जिलों में चुनाव है। 4 तथा 11 मई को चुनाव होना है। पहले चरण में 10 नगर निगम तथा दूसरे में सात नगर निगम लिए गए हैं। एक अप्रैल को इस चुनाव के लिए मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया गया। अब इस चुनाव में 43231827 मतदाता अपने मत का प्रयोग कर सकेंगे।
पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार 9636280 मतदाताओं की संख्या बढ़ी है। इसके अलावा ग्रामीण से शहरों में 2123268 मतदाता जुड़े हैं क्योंकि इनका क्षेत्र अब नगर निकाय में आ गया है। एक जनवरी 2023 को 18 साल की उम्र के हो चुके युवा मतदाता 433088 हैं जो पहली बार अपने मत का प्रयोग करेंगे। इस चुनाव में पुरुष मतदाताओं की संख्या 22983728 जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 20248099 है। अहम बात यह है कि सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों की मतदाता सूची राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी वेबसाइट sec.nic.in पर अपलोड कर दी है। इस पर मतदाता सूची डाउनलोड करें विकल्प में जाकर अपनी सूची खोल सकते हैं।
ओटीपी प्राप्त होगा
इस विकल्प में आगे बढ़ने पर आपको अपना जिला, निगम, वार्ड आदि की सूचना देकर अपना मोबाइल नंबर फीड करना होगा। इस पर आपके मोबाइल पर ओटीपी आएगा जिसे फीड करने पर मतदाता सूची खुल जाएगी। इसके डाउनलोड किया जा सकता है।
वोट बनवाने का मौका गया
राज्य निर्वाचन आयोग के विशेष कार्याधिकारी एसके सिंह ने बताया कि अंतिम सूची का प्रकाशन हो चुका है। दूसरे चरण का नामांकन भी 17 अप्रैल से शुरू हो चुका है। यदि किसी ने इससे पहले मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए प्रार्थनापत्र दिया है तो उसका नाम दूसरे चरण के लिए जोड़ा जा सकता है। अन्य कोई सूरत ऐसी नहीं है कि अब मतदाता सूची में नाम जोड़ा जा सके। इसके लिए कई बार मतदाता पुनरीक्षण अभियान चलाया गया था।
इस बार न एप न मोबाइल संदेश
पिछले चुनाव में राज्य निर्वाचन आयोग ने एक एप विकसित किया था जिस पर मतदाता सूची से लेकर अन्य सभी सूचनाएं थीं। वोटरों को इससे काफी आसानी थी। इसके अलावा मतदाता को उसके मोबाइल नंबर पर मैसेज के जरिए यह सूचना मिल जाती थी कि उसका वोट किस केंद्र पर है। किस नंबर पर है। इससे बड़ी आसानी थी लेकिन इस बार ये दोनों ही व्यवस्थाएं ही नहीं हैं। आयोग के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी अड़चन के कारण इस बार यह संभव नहीं हो पाया।