गदागंज थाना क्षेत्र के सुदामापुर गांव में पसरा सन्नाटा।
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रायबरेली। सुदामापुर गांव में चार दिन से मातम छाया हुआ है। एक साथ चार शवों को देखने की पीड़ा हर आंख में झलक रही है। सुनील के परिवार वाले ही नहीं गांव के लोग भी इस गम से उबर नहीं पा रहे हैं। अब वक्त ही इस जख्म पर मरहम लगा पाएगा। शिक्षक सुनील कुमार, पत्नी पूनम, बेटी समीक्षा व सष्टि के कफन में लिपटे शव देखने के बाद बच्चे-बुजुर्ग सभी सदमे में हैं।
गांव के लोगों ने इस तरह की घटना कभी नहीं देखी थी। गांव में छाया सन्नाटा तभी टूटता है जब कोई अधिकारी या नेता यहां पहुंचता है। चार दिन से जिंदगी थम सी गई है। पीड़ित राम गोपाल के दर्द को देख हर कोई नियति के उलाहना देता है। रविवार सुबह भी गांव में मायूसी का आलम था।
छिन भर में हम बिखर गए...
बेटे सुनील की बात सामने आते ही पिता राम गोपाल बिलख पड़ते हैं। वह कहते हैं कि हम मजदूरी किए, भूखे रहे, हमार बेटा भी गरीबी सहकर आगे बढ़ा...। सोचा था कि बेटा आगे बढ़ जाए तो नाम रोशन होगा...। हमार सहारा बनी, पर भगवान ने ऐसा लूटा कि हम छिन भर में बिखर गए...। पुरानी बातें याद कर कहते हैं कि रात को बेटवा का फोन आवत रहै तो पूछत रहै कि पैसे की जरूरत तो नहीं है...। यदि कह देत कि जरूरत हो तो तुरंत फोन से ही पैसा भेज देत रहै...। राम गोपाल ने बताया कि मुख्यमंत्री से मिले रहेन...। वह हमको हर तरह की मदद की बात कहे हैं...। इसी के साथ भावुक होकर कहते हैं कि जिंदगी तो बेकार हो गई, पर का करें, जियै का तो परी...। अब बड़े बेटवा पर जिम्मेदारी है...।