- फर्जी आईडी पर लिए प्रीएक्टिवेटेड सिम से गिरोह के हर सदस्य ने बना रखे थे दस-दस फेक अकाउंट- जो भी जाल में फंसता था उसे एजेंट के तौर पर गिरोह में कर लेते थे शामिल, उसके जरिये खपाते थे जाली नोट
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। जाली नोट छापने वाले गिरोह ने फेसबुक, इंस्टाग्राम व अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर फेक नामों से करीब 50 अकाउंट बनाए थे। एक-एक सदस्य ने दस-दस अकाउंट बना रखे थे, जिनके जरिये नकली नोटों का कारोबार कर रहे थे। सोशल मीडिया अकाउंट फर्जी आईडी पर लिए प्री-एक्टिवेटेड सिम के जरिये बनाए थे। पुलिस की जांच में इन सभी तथ्यों का खुलासा हुआ है।
डीसीपी नॉर्थ एसएम कासिम ने बताया कि जाली नोटों के लिए जो भी लोग गिरोह से संपर्क करते थे, वह उनको अपने साथ में बतौर एजेंट शामिल कर लेते थे। इसके एवज में उनको पांच से दस फीसदी रकम देने का दावा करते थे। इसलिए जो पहले उनसे ग्राहक बनकर नोट खरीदता था, बाद में वह खुद अपने स्तर से गिरोह बनाकर नोटों की सप्लाई करने लगता था। सैकड़ों एजेंट आरोपियों के संपर्क में है। आरोपियों के मोबाइल में एजेंट के नाम कोडवर्ड में सेव हैं। खासकर उन्होंने शहर के नाम से एजेंट के नाम सेव किए थे, जिससे आसानी से वह उनको चिन्हित कर सकें और जब वह जाएं तो इसका खुलासा न हो सके, लेकिन पुलिस तह तक पहुंच गई।
बाजार में नोट चलाकर दिखाते थे
पुलिस के मुताबिक जो भी शख्स आरोपियों से डील करता था, वह उनसे मिलने भी आता था। इस दौरान आरोपी साथ में जाकर बाजार में जाली नोट चलाकर दिखाते थे, जिससे लोगों को विश्वास हो जाता था। उसके बाद वह उनसे अधिक नोट लेते थे। पुलिस की तफ्तीश में सामने आया कि तमाम लोगों ने आरोपियों के खाते में रकम भेजी थी, जिसका विवरण पुलिस ने जुटाया है।
धोखाधड़ी कर भी खपाते थे रकम
आरोपी धोखाधड़ी करके भी जाली नोट खपाते थे। वह छोटे-छोटे भुगतान में इन्हीं जाली नोटों का इस्तेमाल करते थे। खासकर वह बुजुर्ग दुकानदारों को निशाना बनाते थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनके एजेंट बड़ी रकम के साथ ऐसे नोट बीच में रखकर भी खपा देते थे।
गैंगस्टर लगेगा, जांच एजेंसी भी सक्रिय
पुलिस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है। पूरी कार्रवाई के बाद पुलिस आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करेगी। इसके अलावा अन्य जांच एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। दरअसल फेक करेंसी बेहद गंभीर मामला है। इसलिए एजेंसी अपने स्तर से भी तहकीकात कर रही हैं।