अक्तूबर में लगातार हो रही बारिश से प्रदेश में हालात बिगड़ गए हैं। अवध के अधिकांश जिलों में बाढ़ ने तबाही मचा रखी है। अकेले अवध में 12.50 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। वहीं, प्रदेश के अन्य जिलों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है या खतरा मंडरा रहा है। इस बीच, मौसम विभाग ने रविवार को लखनऊ समेत प्रदेश के 45 जिलों में बारिश की चेतावनी जारी की है। मुरादाबाद, रामपुर, बरेली व आसपास के इलाकों में भारी से ज्यादा भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। स्थिति को देखते हुए पश्चिम के कई जिलों में स्कूलों में एक से दो दिन की छुट्टी तक करनी पड़ी है।
मौसम विभाग के अनुसार एक से 9 अक्तूबर के बीच यूपी में 92.3 मिमी बारिश हुई है जो सामान्य से 76.9 मिमी ज्यादा है। पश्चिमी यूपी के मेरठ, बागपत, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मुरादाबाद समेत कई जिलों में बारिश से नदिया उफान पर हैं। बिजनौर में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 220 मीटर से सिर्फ दो मीटर नीचे रह गया है। वहीं, कालागढ़ डैम में जलस्तर 355 मीटर के ऊपर पहुंच गया है। बाढ़ के चलते फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। धान गिर गई है तो गन्ने का भी यही हाल होने लगा है। जहां आलू बोया जा चुका है उसके सड़ने का डर पैदा हो गया है।
बलरामपुर के शहरी इलाकों में चल रही नाव
अवध के जिलों गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, सीतापुर व बाराबंकी में सैकड़ों गांव पानी से घिर चुके हैं। बलरामपुर में राप्ती नदी खतरे के निशान 104.620 मीटर से 130 सेमी ऊपर बह रही है। यहां भड़रिया बांध शनिवार देर रात करीब 400 मीटर तक कट गया। इससे 430 गांवों के साथ शहर में भी पानी पहुंच गया। 200 गांव टापू बन गए। शहरों में दुकानें बंद करनी पड़ीं। सदर तहसील से कलेक्ट्रेट तक पानी भर गया है। कई मोहल्लों में नावें चल रही हैं।
कहां क्या हालात
अयोध्या में सरयू खतरे के निशान से 20 सेमी ऊपर तो गोंडा में 56 सेमी ऊपर बह रही है। गोंडा में दीवार गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। सीतापुर के रेउसा/रामपुर मथुरा समेत कई इलाके जलमग्न नजर आ रहे हैं। अंबेडकरनगर में सरयू का जलस्तर प्रति घंटे एक सेमी बढ़ रहा है। वहीं, श्रावस्ती में राप्ती का जलस्तर जमुनहा के राप्ती बैराज पर खतरे के निशान से अभी 110 सेमी अधिक है। बहराइच में नेपाल से 4.65 लाख क्यूसेक पानी छोड़ने से 130 गांव बाढ़ से घिर गए हैं।
कहां कितने प्रभावित...
बलरामपुर में 5 लाख, श्रावस्ती में 3 लाख, बहराइच में 2 लाख, बाराबंकी में 1.5 लाख, सीतापुर 85 हजार, गोंडा में 5 हजार आबादी।
धान, आलू को नुकसान, आम के लिए फायदेमंद
‘भारी बारिश ने सरसों, गाजर, मूली, चुकंदर, धनिया, सोया, पालक, मेथी की बोआई की तैयारियों को चौपट कर दिया है। धान, ज्वार, बाजरा व सफेद तिल के लिए यह बारिश बेहद नुकसानदायक है। ज्यादा बारिश में आलू का बीज सड़ जाता है। हालांकि आम की फसल के लिए बारिश फायदेमंद है। पेड़ों की धुलाई हो गई है, जिससे कीटों के हमले का खतरा कम हो गया है। जो पनप चुके थे वो मर गए।’
- डॉ. सत्येद्र कुमार सिंह, कृषि विशेषज्ञ, चंद्रभानु गुप्त कृषि स्नातकोत्तर महाविद्यालय
किसानों में निराशा
लखनऊ के गोसाईंगंज-मोहनलालगंज की नगर पंचायत नगराम और निगोहां के किसानों का कहना है कि जहां-जहां फसलें कटने को तैयार थीं, उनका बहुत नुकसान हुआ है। मन्ना सिंह कहते हैं कि फूल ले रही उड़द, मूंग की फसल चौपट हो गई है। पानी के कारण तिल की फसल भी खराब हो चुकी है। धान तो गिरा पड़ा है।