कोर्ट ने अतीक के खिलाफ मामला बंद करते हुए कहा की सर्वविदित है की आरोपी की मौत हो चुकी है, लिहाजा ऐसे में किसी औपचारिकता की ज़रूरत नहीं है। आरोपी अतीक अहमद के खिलाफ चल रहे मामले को समाप्त किया जाता है।
इसके पहले कोर्ट में सीबीआई ने अतीक अहमद की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पंचनामा और एफआईआर को प्रयागराज के पुलिस अधीक्षक अपराध से सत्यापित कराकर पेश किया। वहीं लखनऊ जेल में बंद अतीक के बेटे और मामले के आरोपी मोहम्मद उमर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया। उमर की ओर से वकील विजय मिश्रा ने कोर्ट में एक अर्जी देकर बताया कि जेल प्रशासन उन्हें उमर से मिलने नहीं दे रहा है। जिसके कारण आरोपी उमर को मनपसंद वकील रखने और अपना बचाव करने के अधिकार से भी वंचित किया जा रहा है। मोहम्मद उमर की ओर से दी गई इस अर्जी पर कोर्ट ने जेल अधीक्षक लखनऊ से रिपोर्ट तलब की है।
सुनवाई के समय आरोपी नितेश मिश्रा, महेंद्र एवं पवन कुमार की ओर से उनकी हाजिरी को माफ करने की मांग वाली अर्जी दी गई जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। जबकि अन्य आरोपी इरफान, योगेश एवं दयानंद कोर्ट में हाजिर रहे। वहीं दूसरी ओर फतेहपुर जेल में बंद अन्य आरोपी फारूख और लखनऊ जेल में बंद अन्य आरोपी वीडियो कॉल पर कोर्ट में हाजिर हुए।
सीबीआई के लोक अभियोजक को कोर्ट की नसीहत
इसी मामले में कोर्ट ने सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक की लापरवाही पर नसीहत भी दिया। दरअसल कोर्ट में सुनवाई चल रही थी, लेकिन सीबीआई के वरिष्ठ लोक अभियोजक दिन के बारह बजे तक कोर्ट में हाजिर ही नहीं हुए। इस पर कोर्ट ने उन्हें बुलावा भेजा तो वह 12 बजे के बाद हाजिर हुए, लेकिन भोजनावकाश के बाद दो बजे जब कोर्ट में फिर से सुनवाई शुरू हुई तो फिर से कोर्ट में नहीं थे। इस पर कोर्ट ने उन्हें निर्देश देते हुए कहा की वह कोर्ट में समय से हाजिर हुआ करें और मामले में सीबीआई की तरफ से प्रभावी पैरवी करें।