संचार क्रांति से इंसानी जिंदगी में काफी बदलाव आया है। अब हम मोबाइल फोन के बिना रहने की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं।
ये मानना है आईआईटी रुड़की एल्युमिनाई एसोसिएशन के सचिव जीतेश श्रीवास्तव का।
वे आईआईटी रुड़की एल्युमिनाई एसोसिएशन की ओर से आयोजित ‘मोबाइल टॉवर से होने वाले खतरों के मिथक और वास्तविकता’ विषय पर कार्यशाला में बोल रहे थे।
यहां मौजूद विशेषज्ञों ने इसी विषय पर अपने विचार प्रकट किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए न्यायमूर्ति राकेश शर्मा ने बताया कि इलेक्ट्रानिक आवृत्ति विकिरण के मानदंड ठीक से तय किए जाने चाहिए।
भारत में मोबाइल टॉवर लगाने वाली कंपनी को ईएमआर दायरे के अंदर ही टॉवर लगाने होते हैं। इसे लेकर उच्च न्यायालय ने कड़े नियम लागू किए है।