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Lucknow News: डेढ़ साल से खाली पड़ी आयुष विंग की दवा अलमारी

Sun, 09 Jun 2024 03:35 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
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रायबरेली। आयुष विंग को सरकार ने जिस मंशा से स्थापित कराया था वो पूरी न हो पाई। ये केवल कागजों में ही सिमट कर रह गए। अब यहां पर बजट का अकाल पड़ गया है और खामियाजा भुगत रहा है इलाज की उम्मीद पाले मरीज। जिला अस्पताल के साथ ही सभी सीएचसी में आयुष विंग की दवा की अलमारी पिछले डेढ़ साल से खाली पड़ी है। पहले से जो दवाएं उपलब्ध थीं, वह भी अब खत्म हो चुकी हैं। आयुर्वेदिक चिकित्सक भी अन्य डॉक्टरों की तरह एलोपैथी की दवाएं मरीजों को लिख रहे हैं।
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शासन से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत जिला अस्पताल और सभी पीएचसी में भी एलोपैथ के साथ ही आयुर्वेदिक दवाएं मरीजों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। इसके लिए अस्पतालों में संविदा पर आयुष चिकित्सकों की तैनाती भी हुई है। शुरूआत में काफी संख्या में पर्याप्त आयुर्वेदिक दवाएं सीएचसी को उपलब्ध कराई जा रही थीं, लेकिन धीरे-धीरे दवाओं की कटौती शुरू कर दी गई। स्थिति यह हो गई है कि आयुर्वेदिक दवाओं की खरीद के लिए पिछले करीब डेढ़ साल से सीएमओ को फूटी कौड़ी तक नहीं मिली।

जिला अस्पताल के आयुष विंग में खाली पड़ी अलमारी
जिला अस्पताल परिसर में बने आयुष विंग में इस समय दवाओं के अभाव में अलमारी खाली पड़ी हुई है। यहां पर मौजूद आयुष चिकित्सक दवाओं के न होने पर एलोपैथिक दवाएं लिख रहे हैं। जब यहां पर दवाएं थी तो मरीजों की रोजाना 150 से 200 ओपीडी होती थी। आयुष चिकित्सक डॉ. सौरभ शर्मा का कहना है कि आयुर्वेदिक दवाएं उपलब्ध न होने के कारण शासन से तय एलोपैथ दवाएं मरीजों को लिखी जा रही हैं।
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यह हैं जरूरी आयुष दवाएं
आयुष विंग में मरीजों के लिए अभयारिष्ट, दशमूलारिष्ट, संजीवनीवटी, लौगनादिवटी, अर्शकुठार, शीतोप्ला, सुदर्शन चूर्ण, कायम चूर्ण, त्रिफला, कुटजघन वटी, कुटजारिष्ट, बिजला चूर्ण, भाष्कण चूर्ण, गविपतिकर चूर्ण, पुष्यानुग चूूर्ण, अश्वगंधा चूर्ण, गिलोय चूर्ण, चंद्रप्रगावरी, चितकादि चूर्ण, लवगादि चूर्ण, अर्श कुष्कर रस, इच्छाभेदी रस, कोचनार गुग्गुल, महानारायण तेल आदि आयुर्वेदिक दवाएं उपलब्ध कराई गई थीं।

आयुष विंग में आयुर्वेदिक दवाएं उपलब्ध कराने के लिए करीब डेढ़ साल से बजट नहीं मिला है। दवाओं की खरीद न होने के कारण दवाओं की कमी हो गई है। आयुष चिकित्सकों को अस्पतालों को मिलने वाली दवाएं मरीजों को लिखने के आदेश दिए गए हैं।
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डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
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