लखनऊ। शायर मजाज की पुण्यतिथि पर मंगलवार को पेपर मिल काॅलोनी स्थित उनकी कब्र पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए शहर के बुद्धिजीवी पहुंचे। इस मौके पर लोगों ने पुष्पांजलि देते हुए उनकी मज़ार को संरक्षित करने के साथ ही उसका जीर्णोद्धार कराने की मांग उठाई।
इस मौके पर याद ए मजाज के अंतर्गत एक संगोष्ठी का भी आयोजन हुआ। इसमें लेखक हफीज किदवई ने उन्हें याद करते हुए कहा कि मजाज औरत और आदमी में बराबरी के पैरोकार और समाज में सदभाव लाने के हिमायती थे। वे बहुत संवेदनशील थे, यह उनकी निजी जिंदगी के साथ शायरी में भी दिखता था। किदवई ने मजाज और उनकी बहन सफिया अख्तर के बीच जुड़ाव पर भी बात की। लेखक फरजाना मेहंदी और सबाहत ने मजाज की नज़्म औरत, मजदूर और बोल पढ़ी, जिसे खूब सराहा गया। इस मौके पर रामकिशोर,भगवान स्वरूप कटियार, सुभाष राय, परवेज मलिकजादा, निहालुद्दीन उस्मानी, आशीष यादव, एहतिशाम साहब आदि मौजूद रहे।
कॉफी हाउस टेबल नंबर छह थी खास
हफीज किदवई ने बताया कि मजाज को इंडियन कॉफी हाउस में बैठना बहुत पसंद था। यहां टेबल नंबर छह मजाज की टेबल कही जाती थी। उस पर बैठने से पहले लोग पूछा करते थे कि मजाज तो नहीं आए हैं। उन्होंने कहा कि मजाज ने अपनी जिंदगी के अंतिम दिन लखनऊ शहर में बिताए और उनका निधन बलरामपुर अस्पताल में हुआ। उन्होंने इस शहर को और शहर ने उन्हें बेपनाह मोहब्बत दी।