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ईडी का खुलासा : अपराध की कमाई से माफिया मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे अब्बास ने खरीदे विदेशी असलहे

Mon, 10 Apr 2023 10:10 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

गाजीपुर और मऊ पुलिस ने मुख्तार और उसके परिजनों पर कई मुकदमे दर्ज करने के साथ ईडी से मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज करने का अनुरोध किया था। ईडी की प्रयागराज यूनिट ने 30 जून 2021 को पुलिस रिपोर्ट के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू की थी।
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अब्बास अंसारी, मुख्तार अंसारी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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माफिया मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे अब्बास अंसारी का विदेशी असलहे खरीदने का शौक महंगा पड़ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में सामने आया है कि अब्बास ने अपराध जगत से अर्जित कमाई से आठ विदेशी असलहों को खरीदा था। ईडी ने इस प्रकरण को प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग का मामला करार देते हुए अब्बास पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।

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बताते चलें कि गाजीपुर और मऊ पुलिस ने मुख्तार और उसके परिजनों पर कई मुकदमे दर्ज करने के साथ ईडी से मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत केस दर्ज करने का अनुरोध किया था। ईडी की प्रयागराज यूनिट ने 30 जून 2021 को पुलिस रिपोर्ट के आधार पर केस दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान ईडी को मुख्तार की पत्नी अफशा अंसारी व अन्य पार्टनरों की विकास कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ भी मनी लांड्रिंग के पुख्ता सुराग मिले थे। इसके बाद विकास कंस्ट्रक्शन की संपत्तियों को जब्त करने की कवायद शुरू कर दी गयी। इस मामले में मुख्तार की पत्नी अफशा अंसारी को नोटिस देकर पूछताछ के लिए तलब किया गया था, लेकिन वह जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुईं। जांच में अफशा अंसारी के खाते से अब्बास अंसारी को लाखों रुपये भेजने की पुष्टि होने पर उसे भी ईडी ने आरोपी बनाया था। बीती 19 मार्च को ईडी ने मुख्तार अंसारी, उसके बेटे अब्बास अंसारी और साले सरजील उर्फ आतिफ रजा के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।

मुख्तार के इशारे पर टेंडर किया हासिल
ईडी की जांच में सामने आया है कि मुख्तार अंसारी ने गाजीपुर और मऊ में सरकारी जमीन पर कब्जा करके गोदाम बनाए थे। दोनों जिलों में भारतीय खाद्य निगम के गोदाम का टेंडर जारी हुआ, तो मुख्तार के इशारे पर अब्बास ने किसी अन्य कंपनी को टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेने दिया। इन गोदामों के किराए के एवज में विकास कंस्ट्रक्शन को 15.31 करोड़ रुपये मिले, जिसे अफशा, अब्बास, शरजील आदि ने आपस में बांट लिया। अधिकतर रकम अफशा के खाते में भेजी गयी जिसे अब्बास के खाते में ट्रांसफर किया जाता रहा। साथ ही, बड़े पैमाने पर नगद धनराशि को भी विकास कंस्ट्रक्शन, अब्बास और अफशा के लखनऊ स्थित बैंकों के खातों में जमा कराया गया।

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