उत्तर प्रदेश में लंपी वायरस का प्रसार अब थमने लगा है। डेढ़ करोड़ के लक्ष्य के सापेक्ष सवा करोड़ गोवंश में गॉट पोक्स वैक्सीन का टीकाकरण किया जा चुका है। इसका परिणाम हैं कि यह वायरस 31 जिलों से बाहर नहीं निकला है। उधर इससे प्रभावित हुए 96 हजार पशुओं में से 78 हजार गोवंश ठीक हो चुके हैं।
लंपी वायरस से गोवंश को बचाने के लिए प्रदेश भर में युद्धस्तर पर टीकाकरण का अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश में रोजाना 4 लाख टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही प्रदेश में 6408 गो आश्रय स्थलों की स्थापना की जा चुकी है, जिसमें 9 लाख से अधिक गोवंश रह रहे हैं। वहां भी इस बीमारी से निपटने का अभियान चलाया गया है।
अतिवृष्टि के बीच लंपी वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सभी गांवों में पंचायती राज एवं नगर विकास विभाग के सहयोग से एंटी लार्वा औषधि का छिड़काव करने को कहा गया है। अतिवृष्टि एवं संभावित बाढ़ के दृष्टिगत सघन निगरानी करने व लंपी वायरस से प्रभावित गोवंश तथा रोग से मृत गोवंश की सूचना तत्काल मुख्यालय को देने को कहा गया है । अपर मुख्य सचिव, पशुधन, डॉ. रजनीश दुबे के मुताबिक प्रदेश में लंपी वायरस केवल 31 जिलों के 5962 गांवों तक ही सीमित रह गया है।
प्रदेश में बनेंगे दो से तीन हजार गोवंश धारण क्षमता के गोआश्रय स्थल
अपर मुख्य सचिव के मुताबिक प्रदेश में लोगों को गोवंश के प्रति जागरुक करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। योगी सरकार ने विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पशुपालकों को 1.50 लाख गोवंश दिए हैं। सरकार द्वारा स्वीकृत 303 गोसंरक्षण केंद्रों के सापेक्ष 228 केंद्र क्रियाशील हैं जबकि 75 केंद्र निर्माणाधीन हैं जो जल्द ही शुरू हो जाएंगे। वहीं प्रत्येक विकासखंड में 2 एवं 3 हजार गोवंश धारण क्षमता के गोआश्रय स्थलों की स्थापना का लेआउट तैयार कर लिया गया है। इसके लिए प्रदेश के 24 जिलों से प्रस्ताव भी प्राप्त किए जा चुके हैं। 2 हजार गोवंश क्षमता के आश्रय स्थल के लिए 27 एकड़ भूमि की आवश्यकता पड़ेगी, जिस पर करीब 8 करोड़ 33 लाख खर्च होंगे जबकि 3 हजार गोवंश क्षमता के आश्रय स्थल के लिए 40 एकड़ भूमि की आवश्यकता पड़ेगी, जिस पर करीब 12 करोड़ 8 लाख का खर्च आएगा।