लखनऊ विश्वविद्यालय ने 16 बीएड कॉलेजों को स्थायी मान्यता के प्रस्ताव लेने के लिए 31 जनवरी तक का समय दिया है। लविवि कार्य परिषद के निर्देश के अनुसार बगैर स्थायी मान्यता के कोई पाठ्यक्रम अधिकतम तीन साल तक चलाया जा सकता है।
इन कॉलेजों में बीएड पाठ्यक्रम की अस्थायी मान्यता लिए तीन साल बीत चुके हैं। इस कारण विवि ने इन्हें तय समय तक निरीक्षण आख्या देकर मान्यता स्थायी कराने के लिए कहा है।
लविवि की 19 जून 2017 को हुई कार्य परिषद के अनुसार तीन साल तक स्थायी मान्यता न लेने पर एक साल का अतिरिक्त समय दिया जाता है। चौथे साल स्थायी मान्यता न ले पाने पर पांचवें साल से प्रतिवर्ष एक लाख रुपये का अर्थदंड लगाया जाता है। अर्थदंड के साथ पाठ्यक्रम संचालन की अधिकतम अवधि सात साल है। इसके बाद पाठ्यक्रम में दाखिला लेने पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाती है।
इन 16 कॉलेजों की तीन साल अस्थायी मान्यता की समयसीमा 30 जून को समाप्त हो रही है। शासन के निर्देश अनुसार 28 फरवरी तक इनकी निरीक्षण आख्या आनी है। इसके आधार पर 10 मई तक पाठ्यक्रमों की सहयुक्तता फाइल पर फैसला करना है। इसके लिए कॉलेजों को 31 जनवरी तक विवि को प्रस्ताव देना है।