लखनऊ। नई शिक्षा नीति के तहत लखनऊ विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को सभी पाठ्यक्रमों की पढ़ाई उनकी मातृभाषा में करने का मौका देगा। कई पाठ्यक्रमों में हिंदी माध्यम की किताबें अभी भी उपलब्ध नहीं हैं। इसे देखते हुए लविवि प्रशासन ने सभी विभागाध्यक्षों को 8 अप्रैल तक उनके यहां पाठ्यक्रमों की पढ़ाई का माध्यम और किताबों की उपलब्धता की सूचना मांगी है। जहां पर हिंदी माध्यम की किताबें नहीं होंगी, वहां व्यवस्था की जाएगी।
लविवि की डीन एकेडमिक्स प्रो. पूनम टंडन के अनुसार, विद्यार्थी अपनी मातृभाषा में कही और पढ़ी गई बात ज्यादा आसानी से समझता है। मातृभाषा में पढ़ाई करके शोध और नवाचार को और बेहतर बनाया जा सकता है। नई शिक्षा नीति में मातृभाषा में पढ़ाई की बात कही गई है। कला और वाणिज्य संकाय की ज्यादातर पुस्तकों के हिंदी अनुवाद मौजूद हैं, लेकिन विज्ञान संकाय में अब भी काफी किताबें हिंदी में उपलब्ध नहीं हैं। इसे देखते हुए विभागाध्यक्षों से सूचना मांगी गई है। इसके बाद सभी की बैठक बुलाकर हिंदी माध्यम की किताबें उपलब्ध कराने की योजना बनाई जाएगी। प्रयास होगा कि सभी विद्यार्थियों को अंग्रेजी के साथ ही हिंदी भाषा में गुणवत्तापूर्ण किताबें मिल सकें।
इंजीनियरिंग व फॉर्मा की पुस्तकों के लिए अभियान
लविवि में इस समय इंजीनियरिंग और फॉर्मा की पढ़ाई भी हो रही है। इनकी ज्यादातर पुस्तकें अंग्रेजी में ही हैं। लविवि के इस अभियान के बाद इन विषयों में भी हिंदी माध्यम की किताबें उपलब्ध हो सकेंगी। ऐसा होने पर विद्यार्थियों की पढ़ाई में भाषा की बाधा आड़े नहीं आएगी।
शिक्षकों से मांगेंगे प्रस्ताव
विभागाध्यक्षों से सूचना आने के बाद मातृभाषा में किताबें उपलब्ध कराने के लिए शिक्षकों से प्रस्ताव मांगे जाएंगे। इसके बाद किताबों के अनुवाद का काम किया जाएगा जिससे कि सभी विद्यार्थियों को हिंदी माध्यम की किताबें उपलब्ध हो सकें।
- प्रो. पूनम टंडन, डीन एकेडमिक्स