लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय से संबद्ध होने के बाद से पड़ोसी जनपदों के कॉलेजों में छात्र संख्या लगातार कम होती जा रही है। पिछले तीन साल के दौरान 28.52 फीसदी विद्यार्थी सीतापुर जनपद में कम हुए हैं। वर्ष 2020 से हरदोई, सीतापुर, रायबरेली और लखीमपुर खीरी के डिग्री कॉलेज लविवि से संबद्ध कर दिए गए थे। इससे पहले तक ये कॉलेज कानपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध थे।
लखनऊ विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति में सुधार करने की मंशा के तहत शासन ने हरदोई, सीतापुर, रायबरेली और लखीमपुर के डिग्री कॉलेज लविवि से संबद्ध कर दिए थे। इसके बाद हर साल इन जनपदों के कॉलेजों में साल दर साल दाखिले कम होते जा रहे हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मिली सूचना के मुताबिक, चारों जनपदों के इक्का-दुक्का कॉलेजों को छोड़कर लगभग हर कॉलेज के दाखिलों में साल दर साल कमी आती जा रही है।
लखनऊ के बाद हरदोई के कॉलेजों में कम गिरावट
दाखिलों में कमी के मामले में 28.52 फीसदी गिरावट के सीतापुर के कॉलेज पहले नंबर पर हैं। इसके बाद 19.92 फीसदी गिरावट के साथ रायबरेली दूसरे, 13.73 फीसदी कमी के साथ लखीमपुर खीरी के कॉलेज तीसरे, 11.03 फीसदी कमी के साथ हरदोई के कॉलेज चौथे और लखनऊ जनपद के कॉलेज 6.25 फीसदी कमी के साथ आखिरी नंबर पर हैं।
जनपदवार हर सत्र में दाखिलों की स्थिति-
जनपद- सत्र 2021-22- 2022-23- 2023-24- दाखिलों में कमी- कमी प्रतिशत
सीतापुर- 28,134- 24,140- 20,110- 8,024- 28.52
रायबरेली- 26,768- 22,655- 21,437- 5,331- 19.92
लखीमपुर खीरी- 23,871- 21,001- 20,593- 3,278- 13.73
हरदोई- 33,045, 31,776, 29,400- 3,645- 11.03
लखनऊ- 55,327- 56,488- 51,871- 3,456- 6.25
कुल- 1,67,145- 1,56,060- 1,43,411- 23,734- 14.19
महंगी परीक्षा फीस है मुख्य वजह
लखनऊ विश्वविद्यालय की परीक्षा फीस अन्य विश्वविद्यालयों के मुकाबले काफी अधिक है। साथ ही परंपरागत पाठ्यक्रमों से विद्यार्थियों का मोहभंग हो रहा है। दाखिलों में कमी की यह भी एक बड़ी वजह है। सरकार को इस पर ध्यान देना होगा। - डॉ. मनोज पांडेय, अध्यक्ष- लखनऊ विश्वविद्यालय सहयुक्त कॉलेज शिक्षक संघ