गर्भनिरोधक के सुरक्षित साधनों में से एक कॉपर-टी को लेकर मिथकों के मायाजाल ने महिलाओं को उलझा रखा है। सुनी-सुनाई बातों को लेकर दिल में वहम पाले महिलाएं कॉपर टी को अपनाने से कतराती हैं। सरकारी अस्पतालों में इन दिनों अलग ही कवायद देखी जा रही हैं, लगातार इसके लिए गर्भवती को प्रेरित किया जा रहा है। इसके बावजूद खुद से कॉपर-टी लगवाने आने वाली महिलाओं की संख्या शून्य है। शहर की जानी मानी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों का कहना है कि इसे लेकर मिथक कितने मजबूत हैं, इसका अंदाजा लोकबंधु चिकित्सालय व क्वीन मेरी अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा बताए गए इसी प्रतिशत से लगाया जा सकता है कि गर्भावस्था की शुरुआत से लेकर लेबर रूम तक लगातार काउंसिलिंग के बाद महज 10 से 30 फीसदी तक ही महिलाएं इसके लिए राजी होती हैं।
पहले जरा इन मिथकों को जानिए
क्वीन मेरी अस्पताल की डॉ. सुजाता देव कहती हैं कि कॉपर टी का जिक्र आते ही महिलाएं गिनाने लगती हैं कि इसे लगवाने से सिरदर्द होता है, माहवारी अनियमित हो जाती है, यौन संबंध प्रभावित होते हैं, कैंसर हो जाता है, दर्द बना रहता है।
गर्भपात के खतरे...इसे भी समझें
क्वीन मेरी अस्पताल की डॉ. पुष्प लता शंखवार कहती हैं कि आम तौर पर गर्भनिरोधक उपाय स्थायी और अस्थायी होते हैं। स्थायी में नसबंदी है, जिसे एक उम्र, बच्चों की संख्या आदि के आधार पर तय किया जाता है। वहीं अस्थायी उपायों में खाने की गोली, इंजेक्शन, कंडोम और कॉपर-टी का विकल्प है। चूंकि कॉपर-टी 5 से 10 साल के लिए काम करता है, इसलिए इसे ज्यादा सुरक्षित मानकर इसकी सलाह दी जा रही है। ऐसा देखा गया है कि कई बार महिलाएं गोली खाना भूल जाती हैं या इंजेक्शन को समय पर लगवाने में लापरवाही हो जाती है। नतीजा अनचाहा गर्भ ठहरना। ऐसा एक नहीं बल्कि दो-तीन बार होता है, नतीजा महिला की सेहत पर इसका असर होता है।
आंकड़े भी बताते हैं लोगों की मानसिकता को
लोक बंधु चिकित्सालय की डॉ. कंचन मिश्रा कहती हैं कि आम दिनों में एक महीने में 250-300 बच्चे पैदा होते हैं अस्पताल में। बीते महीने की बात करें तो 180 सामान्य प्रसव थे, इसमें से 27 ने कॉपर टी लगवाई। 110 सिजेरियन थे, जिसमें से 21 लोगों ने नसबंदी और 22 ने कॉपर टी लगवाई। पहले कॉपर टी डिलीवरी और सिजेरियन के तुरंत बाद नहीं लगाई जाती थी, लेकिन अब तुरंत लगा दी जाती है। खास बात है कि पर्याप्त जांच के बाद ही कॉपर टी लगाई जाती है। गर्भनिरोधकों के सही इस्तेमाल न होेन के कारण गर्भपात बढ़ रहा है और हर महीने 30-40 महिलाएं अबॉर्शन के लिए आती हैं।
कोई दिक्कत हो तो डॉक्टर से मिलें, भ्रम में न रहें
डॉ. सुजाता, डॉ. शंखवार और डॉ. कंचन मिश्रा कहती हैं कि कॉपरटी को लेकर मिथकों में न जिएं। यदि कोई दिक्कत है, डॉक्टर से मिलें, समझें और समस्या के सही कारणों का पता लगाने दें। कई बार मिथकों में रहकर हम बीमारी की जड़ तक नहीं पहुंच पाते हैं और किसी और रोग का शिकार हो जाते हैं।