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Lucknow News : दुर्लभ प्रजाति नहीं, आनुवांशिक विकृति का नतीजा है सफेद हिरण, 15 साल पहले भी मिला था

Tue, 14 Mar 2023 12:02 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

कतर्निया घाट (बहराइच) में हाल ही में एक सफेद हिरण कैमरे में कैद हुआ है, जो अन्य हिरणों के साथ झुंड में है। वहां के डीएफओ ने ट्वीट के माध्यम से यह कहते हुए इसकी जानकारी दी कि कतर्नियाघाट में दुर्लभ सुलभ है।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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कतर्निया घाट में मिला सफेद हिरण कौतुहल बना हुआ है। देश-प्रदेश के लोग इसके बारे में जानने को उत्सुक हैं। वहीं, विशेषज्ञ बताते हैं कि यह कोई दुर्लभ प्रजाति नहीं, बल्कि आनुवांशिक विकृति का नतीजा है। उत्तर प्रदेश वन विभाग ने इस हिरण पर लगातार निगरानी रखने के लिए दो टीमें गठित कर दी हैं।

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कतर्निया घाट (बहराइच) में हाल ही में एक सफेद हिरण कैमरे में कैद हुआ है, जो अन्य हिरणों के साथ झुंड में है। वहां के डीएफओ ने ट्वीट के माध्यम से यह कहते हुए इसकी जानकारी दी कि कतर्नियाघाट में दुर्लभ सुलभ है। कतर्नियाघाट में हिरण प्रजाति के करीब 4500 वन्यजीव हैं। इनमें बारहसिंघा, सांभर, चीतल, पाढ़ा और काकड़ शामिल हैं। अब इस सूची में सफेद हिरण भी आ गया है।

उत्तर प्रदेश के मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक सुनील चौधरी बताते हैं कि सफेद हिरण को एल्बिनो भी कहा जाता है। किसी भी जीव के त्वचा व आंख वगैरह का रंग मेलानिन नाम के पदार्थ पर निर्भर करता है। आनुवांशिक कारणों से जब भी मेलानिन कमजोर पड़ता है तो जीव की त्वचा का रंग सफेद पड़ जाता है। इंसानों की त्वचा के सफेद पड़ने का कारण भी यही होता है। यह एक आनुवांशिक लक्षण है और जीव के माता-पिता, दोनों के जीन में समानता होने पर ही इस तरह की स्थिति उत्पन्न होती है।
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अन्य हिरणों से रंग अलग होने के कारण एल्बिनो शिकारी जानवरों के आसान शिकार बन जाते हैं। एल्बिनो की नजर भी सामान्य हिरणों से कमजोर मानी जाती हैं। इसलिए इनके बचने की प्रायकिता (संभावना) काफी कम हो जाती है। करीब 15 साल पहले उड़ीसा के अंगुल जिले के जंगलों में एल्बिनो मिला था। देश में इनकी गणना का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है, लेकिन इनकी संख्या न के बराबर ही है। इसी तरह से दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भी ये हिरण देखने में आते हैं।

झुंड में अलग-थलग पड़ जाते हैं एल्बिनो
वन्य जीव विशेषज्ञों की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्सर एल्बिनो अपने रंग के कारण अपने झुंड से ही अलग हो जाते हैं। सामान्य कलर के हिरणों का व्यवहार उनके प्रति काफी आशंकाओं से भरा रहता है। वे इनके साथ मेटिंग भी नहीं करते हैं।

एल्बिनो के व्यवहार का होगा अध्ययन
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक सुनील चौधरी ने एल्बिनो की निगरानी के लिए दो टीमें बनाई गई हैं। ये टीमें उसके व्यवहार और उसकी राह में आ रहीं मुश्किलों का अध्ययन करेंगी। हर माह अपनी रिपोर्ट डीएफओ के माध्यम से वन मुख्यालय को भेजेंगी।

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