लखनऊ में पिटबुल के अलावा मास्टिफ और रॉटविलर के पालने, बेचने और ब्रीडिंग सेंटर चलाने पर प्रतिबंध लग सकता है। बीते माह कैसरबाग में पिटबुल के हमले में एक महिला की मौत के बाद शासन ने इसे लेकर यह प्रस्ताव बनाया है। इसके अलावा देसी कुत्तों के पालन को बढ़ावा देने का भी प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें लाइसेंस शुल्क माफ किए जाने की योजना है।
आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के प्रबंधन, रेबीज उन्मूलन, मानव व कुत्तों के संघर्ष में कमी लाने के लिए शासन ने 2018 में एक कमेटी बनाई थी। इस कमेटी को बेचने, पालने और ब्रीडिंग सेंटर चलाने के बिंदुओं को लेकर एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) तैयार करना है। इसे लेकर 15 जुलाई को शासन में बैठक हुई। इसमें मुद्दा उठा कि विदेशी प्रजाति के कुत्तों के लिए भारतीय परिवेश अनुकूल नहीं होता है। इसके कारण वे अधिक आक्रामक होते हैं।
ऐसे में चार विदेशी प्रजाति के कुत्तों (पिटबुल, रॉटविलर, हस्की व साइबेरियन हस्की) के नगर निगम क्षेत्र में पालने, बेचने और ब्रीडिंग सेंटर चलाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए। चर्चा के बाद हस्की व साइबेरियन हस्की को प्रतिबंध से हटाकर मास्टिफ प्रजाति को शामिल किया गया। ऐसे में पिटबुल, रॉटविलर व मास्टिफ प्रजाति के कुत्तों के पालने, बेचने और ब्रीडिंग सेंटर चलाने पर प्रतिबंध लग सकता है।
माफ होगी देसी कुत्तों की लाइसेंस फीस
बैठक में देसी कुत्तों का लाइसेंस माफ करने का प्रस्ताव रखा गया। साथ ही टीकाकरण व नसबंदी भी निशुल्क करने का प्रस्ताव रखा गया। यह भी कहा गया कि मन की बात कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने भी देसी कुत्तों की नस्ल को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। ऐसे में इसके लिए प्रचार-प्रसार किया जाए।
नगर निगम अन्य शहरों को देगा एबीसी की ट्रेनिंग
आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम एनिमल बर्थ कंट्रोल सेंटर (एबीसी) चलाता है। इंदिरा नगर स्थित नगर निगम के जरहरा श्वान केंद्र में यह सेंटर चलता है। प्रदेश के अन्य शहरों में अभी ऐसे सेंटर नहीं चलते हैं। ऐसे में अब उन शहरों के निकायों को यहां ट्रेनिंग दी जाएगी।
अभी शहर में इन पशुओं पालना है प्रतिबंधित
संयुक्त निदेशक पशु कल्याण डॉ. अरविंद राव ने बताया कि शहर में अभी भैंस, सुअर, बकरी, खच्चर, गधे आदि पशुओं के पालने पर प्रतिबंध है। सिर्फ गाय को पाल सकते हैं। कोई भी व्यक्ति नगर निगम से लाइसेंस लेकर सिर्फ दो गाय ही पाल सकता है।