राजूपाल हत्याकांड में वांछित अब्दुल कवि आखिर बीते 18 सालों तक कहां फरार रहा, इस सवाल का सही जवाब पुलिस अधिकारियों के पास नहीं है। दरअसल, उसका फरार रहना किसी रहस्य से कम नहीं है। दरअसल, राजूपाल हत्याकांड को अंजाम देने के दौरान कवि के दाहिने हाथ में गोली लगने के बाद अतीक ने लखनऊ के एक नर्सिंग होम में उसका इलाज कराया था। उसे गाेली लगने की वजह से राजूपाल हत्याकांड में सबके फंसने के डर से अतीक ने कवि की हत्या हो जाने की अफवाह भी फैलाई थी।
जनवरी, 2005 में राजूपाल की हत्या के बाद से कवि के फरार होने के पीछे पुलिस के साथ सीबीआई भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। सीबीआई ने उसकी सुध तब ली, जब उमेश पाल हत्याकांड के बाद जिला पुलिस ने उसके घर को जमींदोज करने की कवायद शुरू की। जिला प्रशासन और पुलिस के हरकत में आते ही सीबीआई भी घर को कुर्क करने कौशांबी पहुंची, जिसे गिराया जा चुका था। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मानें तो राजूपाल हत्याकांड के बाद अतीक ने कवि को प्रयागराज व कौशांबी आने के लिए मना कर दिया था। उसे डर था कि अगर कवि पकड़ा गया तो राजूपाल हत्याकांड में पुलिस को सबसे ठोस सुबूत मिल जाएगा। सालों तक लोग ये समझते रहे कि अतीक ने ही कवि को ठिकाने लगाकर उसकी लाश कहीं फेंकवा दी है। जब सीबीसीआईडी ने राजूपाल हत्याकांड में अब्दुल कवि को वांछित बताते हुए अदालत में चार्जशीट दाखिल की तो वह कौशांबी आने लगा। वह ईद-बकरीद पर अपने घर आता था और दो-तीन दिन तक ठहरता था।
उमेश पाल हत्याकांड के बाद शुरू हुई खोज
उमेश पाल हत्याकांड के अब्दुल कवि के घर पर कुर्की नोटिस चस्पा किया गया। इसके बाद कौशांबी पुलिस की नजरें भी अब्दुल कवि पर टेढ़ी हो गई और मार्च माह में उसकी गिरफ्तारी पर इनाम घोषित कर दिया। पुलिस ने एक माह के भीतर इनाम की राशि एक लाख रुपये कर दी। वहीं अधिकारियों के मुताबिक पिछले 35 दिन में कवि को तलाशने के लिए कई टीमें मुंबई, पुणे, हैदराबाद, रायपुर, सतना, कटनी, जबलपुर, प्रयागराज, जालौन, चित्रकूट, श्रावस्ती, मेरठ और सहारनपुर गईं और छापे मारे गए। पुलिस ने कौशांबी स्थित उसके आवास पर छापा मारकर एक रायफल, चार पिस्टल, कारतूस, बम और चाकू भी बरामद किया था।