दस साल पहले पेशी पर जाते समय फरार हुए हत्या आरोपी दिनेश तिवारी को असम से गिरफ्तार कर लिया गया। चिनहट व क्राइम ब्रांच की टीम ने आरोपी को दबोचा है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी सजायाफ्ता है। एक लाख का इनाम भी घोषित था।
संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था पीयूष मोर्डिया के मुताबिक, देवरिया निवासी दिनेश तिवारी को नाका में 2009 में अपहरण व हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा भी हुई थी। वह पेशी के दौरान 6 अक्तूबर 2012 में पुलिस अभिरक्षा में फरार हो गया था। इस मामले में वजीरगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। आजीवन कारावास की सजा पा चुके दिनेश तिवारी के फरार होने के बाद वर्ष 2014 में उसके खिलाफ पांच हजार का इनाम घोषित किया गया था।
पुलिस कमिश्नर एसबी शिरडकर ने दिनेश तिवारी पर इनाम की राशि पांच हजार से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दी। 18 अक्तूबर को प्रभारी निरीक्षक चिनहट तेज बहादुर सिंह व क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर शिवानंद मिश्रा की संयुक्त टीम ने दिनेश को असम से गिरफ्तार किया। जेसीपी के मुताबिक, आरोपित दिनेश असम में रहकर परचून की दुकान चल रहा था और कोचिंग भी पढ़ता था। पूछताछ में दिनेश तिवारी ने बताया कि वह अंग्रेजी से एमए कर रहा है। दिनेश के खिलाफ नाका के अलावा महानगर, वजीरगंज और जौनपुर जनपद में 6 मुकदमे दर्ज हैं।
यह था मामला
विकासनगर निवासी चांदी प्रसाद के बेटे राकेश कुमार उर्फ मुन्ना की हत्या दिनेश तिवारी ने दोस्त रवि गुप्ता और रविंद्र के साथ मिल कर की थी। राकेश लविवि में एमए का छात्र था। रवि गुप्ता के नाका खुर्शेदबाग स्थित किराए के मकान में मुन्ना का शव मिला था। उसकी बेरहमी से हत्या की गई थी। पुलिस ने मामले में रवि गुप्ता, रविंद्र और दिनेश तिवारी को आरोपी बनाया था। 16 फरवरी 2010 को पुलिस ने दिनेश तिवारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सात अक्तूबर 2012 में विशेष न्यायाधीश एससी एसटी की कोर्ट में दिनेश की पेशी थी, जहां उसे सिपाही राजकिशोर यादव लेकर आया था। सिगरेट पीने के बहाने सिपाही को चकमा देकर दिनेश भाग निकला था।