एसटीएफ ने भारतीय सेना में भर्ती के नाम पर युवाओं से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह के मास्टर माइंड मनीष यादव को चिनहट के मटियारी इलाके से सोमवार देर शाम दबोच उसके पास से लैपटॉप, मोबाइल, ज्वाइनिंग के निर्देश पत्र, पांच कूटरचित पहचानपत्र बरामद किए गए हैं। टीम के मुताबिक आरोपी प्रदेश व केंद्र के कई विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देता था। गिरोह के दो अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
एसटीएफ के डिप्टी एसपी धर्मेश कुमार शाही के मुताबिक मनीष यादव मूलरूप से अंबेडकरनगर के इब्राहिमपुर किसनापुर का रहने वाला है। उसने दो अन्य साथियों संग गिरोह तैयार किया। इसके जरिये बेरोजगारों को सेना में भर्ती के नाम पर झांसा देकर करोड़ों रुपये की वसूली की। एसटीएफ ने गिरोह का इनपुट जुटाया और सोमवार देर शाम मास्टर माइंड मनीष को गिरफ्तार कर लिया।
ढाई करोड़ रुपये की ठगी की पुष्टि
डिप्टी एसपी के मुताबिक मनीष ने बताया कि उसके गिरोह में उसका साला अहिबरनपुर आलोकनगर निवासी जितेंद्र राजपूत व जौनपुर बदलापुर खुर्द का सुशील मौर्य शामिल है। उसने अब तक 30-40 बेरोजगारों को सेना में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी की है। इन सभी से करीब ढाई करोड़ रुपये वसूले हैं। सेना में भर्ती के लिए प्रति व्यक्ति से आठ लाख रुपये लेते थे। मनीष ने बताया कि पहचान पत्र व ज्वाइनिंग निर्देश पत्र उसका साला जितेंद्र तैयार करता था। सुशील बेरोजगारों को फंसाकर उन तक पहुंचाता था। एसटीएफ की टीम गिरोह के दोनों अन्य सदस्यों की तलाश में दबिश दे रही है। इस संबंध में चिनहट थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
खुद को बताता था रक्षा मंत्रालय का अधिकारी
एसटीएफ के एसआई अतुल चतुर्वेदी के मुताबिक मनीष काफी शातिर है। बेरोजगारों से ठगी के लिए वह खुद को रक्षा मंत्रालय का अधिकारी बताता था। जब बेरोजगार उसके सामने जाते तो वह अपनी तैनाती दिल्ली में बताता था। बेरोजगारों को यह भरोसा दिलाता था कि उसके जरिये आसानी से भर्ती हो जाएगी।
त्रिवेणीनगर के कैफे में तैयार होते थे फर्जी दस्तावेज
सेना में भर्ती के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का सारा काम राजधानी के त्रिवेणीनगर से होता था। यहां स्थित कैफे से फर्जी दस्तावेज तैयार किए जाते थे। गिरोह चलाने वाले साले-बहनोई ज्यादातर अयोध्या, आजमगढ़, वाराणसी मंडल के बेरोजगार होते थे। इन बेरोजगारों को फंसाकर लाखों रुपये वसूल लेते थे। इसके बाद फर्जी नियुक्ति पत्र पकड़ा देते। एसटीएफ की टीम इस गिरोह के पूरे नेटवर्क की कुंडली खंगालने में जुट गई है।
पूर्वांचल व अवध के कुछ जिलों में सेना में भर्ती को लेकर ज्यादातर युवक उत्सुक रहते हैं। इसी उत्सुकता और युवकों के चाहत को देखकर फर्जीवाड़े का गिरोह भी सक्रिय हो गया। इस गिरोह में तीन जिलों लखनऊ, अंबेडकरनगर व जौनपुर के तार जुड़े हैं। गिरोह का मुख्यालय लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित त्रिवेणीनगर अहिबरनपुर था। यहां पर जितेंद्र राजपूत के साइबर कैफे से ही सारे फर्जीवाड़े किये जाते हैं। जालसाजों के निशाने पर अयोध्या, गोंडा, अंबेडकरनगर, आजमगढ़, गाजीपुर, बलिया, जौनपुर, वाराणसी, मऊ के बेरोजगार थे। खासकर जो पुलिस व सेना में भर्ती होने की चाहत रखते थे। ऐसे बेरोजगारों को निशाना बनाने के लिए जालसाजों के गिरोह का एक सदस्य इनसे संपर्क करता था। उनको आराम से भर्ती कराने के लिए जानकारी देता था। इसके बदले में रुपये की भी बात कर लेता था। यह काम गिरोह का सुशील मौर्या करता था।
अंबेडकरनगर में मीटिंग, लखनऊ में वसूली
एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक गिरोह का मास्टर माइंड मनीष मूलरुप से अंबेडकरनगर का रहने वाला है। सुशील बेरोजगारों को फंसाने केबाद उनकी पहली मीटिंग अंबेडकरनगर में ही कराता था। इसके बाद सुशील का काम खत्म हो जाता था। फिर मनीष बेरोजगारों को अगली व अंतिम मीटिंग के लिए लखनऊ बुलाता था। जहां अपने साले जितेंद्र के साइबर कैफे के एक कमरे में बैठकर पूरी बातचीत करता था। यहीं पर ही बेरोजगारों से भर्ती के नाम पर सौदेबाजी करता। रकम वसूलने के बाद दस दिन का समय मांगता। फिर उनको जाली नियुक्ति पत्र पकड़ा देता। एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक यहीं पर सारे जाली दस्तावेज तैयार किया जाता था। यहीं पर एक कमरे में बैठकर बेरोजगारों को सेना में भर्ती कराने का व्यूह रचा जाता था। एसटीएफ को जानकारी मिली तो यहां छापा मारा लेकिन आरोपी फरार बताया जा रहा है। एसटीएफ के अधिकारी के मुताबिक इस गिरोह के कई अहम दस्तावेज इस साइबर कैफे से मिलने की उम्मीद है।
एनडीए व सीडीएस के दस्तावेज करते थे डाउनलोड
एसटीएफ की टीम के मुताबिक जालसाजों ने अपना ब्राउजर बना रखा था। त्रिवेणीनगर के साइबर कैफे से मनीष व जितेंद्र एनडीए व सीडीएस की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सभी दस्तावेज डाउनलोड करते थे। इसके बाद उनके महत्वपूर्ण अंशों को जाली वेबसाइट के जरिए एक नया ब्राउजर तैयार करते थे। जिसमें मोनोग्राम से लेकर अन्य निशान भी अंकित कर देते। ताकि उनकी सेना से संबद्घता पर संदेह न हो। इसी ब्राउजर को बेरोजगारों को दिया जाता था। जिसे दिखाकर उनसे मोटी रकम की मांग की जाती थी।
दस दिन बाद देते थे नियुक्ति पत्र
पूछताछ में आरोपी मनीष ने कुबूल किया कि बेरोजगारों से वसूली करने के बाद नियुक्ति पत्र व निर्देश पत्र देने केलिए फर्जी इंटरव्यू के बाद दस दिन का समय मांगते थे। इसके बाद त्रिवेणीनगर में बुलाकर साइबर कैफे से ही बेरोजगारों को जाली नियुक्ति पत्र देते थे। इस दौरान बेरोजगार के घर पर एक पत्र भी भेजा जाता था। जिसमें नियुक्ति की जानकारी दी जाती थी। साथ ही उनके सत्यापन का काम दस दिन में पूरा करने की बात कही जाती थी। फिर लखनऊ बुलाकर जाली नियुक्ति पत्र देते थे।