राज्य विशेष अनुसंधान दल (एसएसआईटी) ने बीते पांच सालों में कई बड़े घोटालों का पर्दाफाश किया है। प्रदेश में फर्जी डिग्री-मार्कशीट, सरकारी विभागों में भर्ती घोटाला, राजस्व की चोरी और छात्रवृत्ति में अनियमितता जैसे तमाम बड़े घोटालों के दोषियों पर सख्त कार्रवाई की गई है। इन मामलों में 1203 करोड़ की राजस्व क्षति को रोका गया। वहीं, 351 दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई, जबकि 1002 को सजा दिलायी गयी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में यूपी पुलिस की सभी इकाइयों की समीक्षा बैठक की थी, जिसमें उन्होंने एसएसआईटी की कार्यप्रणाली की प्रशंसा की। एसएसआईटी की डीजी रेणुका मिश्रा ने बताया कि विभाग की ओर से पिछले पांच वर्षों में दोगुनी रफ्तार से मामलों की जांच और विवेचना की गयी। बताते चलें कि वर्ष 2007 से 2016 के बीच एसएसआईटी ने 47 जांचों और 40 विवेचनाओं का निस्तारण किया। वहीं, वर्ष 2017-2023 के बीच 88 जांचों और 82 विवेचनाओं का निस्तारण किया गया। सीबीआई के मानकों के मुताबिक वर्ष 2007-16 के बीच पांच जांचों और 13 विवेचनाओं का निस्तारण किया गया। इसी तरह, वर्ष 2017 से 2023 के बीच 14 जांचों और 21 विवेचनाओं का निस्तारण सीबीआई के मानकों के अनुसार हुआ।
सीबीआई की तर्ज पर काम
डीजी ने बताया कि एसएसआईटी का डिजिटाइजेशन करने के साथ अधिकारियों और विवेचकों को टैबलेट दिए गये। ई-ऑफिस और केस मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया, जिससे जांच और विवेचनाओं की पत्रवालियों को एक क्लिक पर पढ़ा जाने लगा। उन्होंने बताया कि विभाग ने सीबीआई के मानकों के आधार पर 3 माह में जांच और 1 साल में विवेचना पूरी करने का लक्ष्य रखा है, जिसे जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
सौ दिन का लक्ष्य किया था निर्धारित
विभाग ने मामलों के निस्तारण में तेजी लाने के लिए 100 दिन का लक्ष्य निर्धारित किया था। इसमें कुल लंबित 82 मामलों में से 41 निपटाये गये। इसी तरह पिछले 6 माह में वर्ष 2021 से पूर्व के लंबित मामलों के निस्तारण का लक्ष्य रखा गया, जिसमें 42 पुराने और 12 मामले नये निपटाये गये।