उमेश पाल हत्याकांड में प्रयागराज कमिश्नरेट पुलिस और एसटीएफ को शूटरों का अब तक कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। वारदात के दौरान इस्तेमाल किए गये असलहों, मोबाइल आदि की बरामदगी भी नहीं हो सकी है। जानकारों की मानें तो मंगलवार को गुजरात की साबरमती जेल से लाए गये माफिया अतीक अहमद पर कानूनी शिकंजा कसने में पुलिस इसी वजह से असफल रही। अतीक और अशरफ को उमेश पाल हत्याकांड में पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने की कवायद अचानक रोकनी पड़ गई।
दरअसल, प्रयागराज की एमपी-एमएलए कोर्ट ने जब अतीक को सजा सुना दी, उसके बाद उसे नैनी जेल ले जाया गया था। जेल के बाहर करीब 4.30 घंटे तक अतीक को रोका गया और फिर अचानक उसे वापस साबरमती जेल भेजने का फैसला लिया गया। जानकारों के मुताबिक यदि पुलिस अतीक और अशरफ को रिमांड पर लेने की कवायद करती तो उसे वारदात से जुड़े सुबूतों को बरामद कराना पड़ता।
इस मामले में अभी तक अतीक के बेटे असद समेत किसी भी शूटर की भनक तक पुलिस नहीं लगा सकी है। इन हालात में वारदात से जुड़े सुबूतों को जुटा पाना मुमकिन न हो पाता। इससे दोनों पर हत्या की साजिश के लगाए गये आरोपों को साबित करने में आगे मुश्किल होती। वहीं अतीक के खिलाफ जारी अन्य मुकदमों के विचारण में उल्लेखनीय प्रगति नहीं होने की वजह से उस पर कानूनी शिकंजा नहीं कसा जा सका।
गुजरात के जेल मैनुअल के मुताबिक रहेगा अतीक
माफिया अतीक अहमद को सजा होने के बाद अब गुजरात के जेल मैनुअल के मुताबिक रखा जाएगा। बताते चलें कि अतीक अभी तक साबरमती जेल में विचाराधीन बंदी की तरह रखा गया था। सजायाफ्ता होने के बाद अब उसे जेल मैनुअल के मुताबिक मनचाहे कपड़े पहनने की इजाजत नहीं होगी। उसे जेल प्रशासन की ओर से बाकी सजायाफ्ता बंदियों को दिए जाने वाले कपड़े पहनने होंगे। अब उससे हफ्ते में तीन बार की जगह केवल 15 दिन में एक बार ही परिजन मिलने आ सकेंगे। वहीं उसे जेल मैनुअल के मुताबिक जेल में काम भी करना पड़ेगा जिसका मेहनताना भी मिलेगा।