महाठग संजय शेरपुरिया का केस अब एसटीएफ को ट्रांसफर कर दिया गया है। शासन ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। अब तक विभूतिखंड पुलिस केस की विवेचना कर रही थी। पुलिस ने केस से संबंधित दस्तावेज एसटीएफ को सौंप दिए हैं।
एसटीएफ की नोएडा टीम ने 25 अप्रैल को संजय राय उर्फ संजय शेरपुरिया को कानपुर सेंट्रल स्टेशन से गिरफ्तार किया था। उस पर गोमतीनगर के विभूतिखंड थाने में केस दर्ज किया गया था। आरोप है कि शेरपुरिया ने एनजीओ बनाकर स्वरोजगार देने के नाम पर ठगी की। देश के शीर्ष नेताओं के साथ फोटो खिंचवाकर उसके जरिये धन उगाही की। उस पर मनी लॉन्डि्रंग और टैक्स चोरी के भी आरोप हैं।
दो सप्ताह से पुलिस केस की विवेचना कर रही थी। छह दिन की कस्टडी रिमांड पर लेकर उससे दिल्ली और गुजरात में ले जाकर पूछताछ की थी और कई अहम दस्तावेज जब्त किए थे। चूंकि प्रकरण में शुरू से ही एसटीएफ सक्रिय रही है। इसलिए अब जांच एसटीएफ के हवाले कर दी गई है।
कई बड़े जद में आ सकते हैं
संजय का कनेक्शन सीधे तौर पर कई बड़े अफसरों व नेताओं से हैं। उसके मोबाइल से इस संबंध में कई अहम चैट मिले हैं। अब एसटीएफ इन सभी की भूमिका तलाशेगी। जरूरत पर उनसे पूछताछ भी करेगी। संजय की पत्नी कंचन राय भी रडार पर है। क्योंकि कंचन कंपनियों में संजय के साथ पार्टनर है। संजय की गिरफ्तारी के बाद से वह भूमिगत है।
पहले से जुटा रही थी जानकारी
एसटीएफ केस दर्ज होने के बाद से संजय से संबंधित जानकारी जुटा रही थी। उसकी कंपनियों का विवरण, बैंक खातों की डिटेल आदि के दस्तावेज एसटीएफ के पास हैं। एसटीएफ के पास पुख्ता साक्ष्य हैं कि किस तरह से स्वरोजगार के नाम पर युवाओं से रंजिस्ट्रेशन के नाम पर रकम वसूली गई। एसटीएफ ने संजय के बीस से अधिक करीबी चिह्नित किए हैं। इन पर आशंका है कि वह सभी सहयोगी के तौर पर संजय के साथ काम कर रहे थे। इन सभी पर शिकंजा कस सकता है।